August 17,2026 Fact Recorder
Business Desk: टाटा समूह के भीतर चल रही कथित अंदरूनी खींचतान अब सरकार तक पहुंचने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने हाल ही में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में समूह के भीतर रणनीति, गवर्नेंस, नियुक्तियों और कुछ कारोबारों से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच रणनीतिक फैसलों और गवर्नेंस को लेकर मतभेद, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता और नए बिजनेस वेंचर्स की दिशा जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। एयर इंडिया, टाटा के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सेमीकंडक्टर कारोबार से जुड़े वित्तीय मामलों पर भी चिंता जताए जाने की बात कही गई है।
फरवरी 2027 में पद छोड़ेंगे चंद्रशेखरन
एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को घोषणा की थी कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उनके इस फैसले के बाद टाटा समूह के अगले चेयरमैन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल और उत्तराधिकारी को लेकर अनिश्चितता के बीच टाटा समूह के भीतर नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
नोएल टाटा के दिल्ली दौरे से भी बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा स्वतंत्रता दिवस और पारसी न्यू ईयर की छुट्टियों के दौरान दिल्ली में थे। हालांकि, उनके करीबी सूत्रों ने सरकारी अधिकारियों के साथ किसी बैठक से इनकार किया है। बताया गया कि उनका दिल्ली दौरा टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट से जुड़ा था।
नोएल टाटा ट्रेंट के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं और समूह की 70 वर्ष की रिटायरमेंट नीति के तहत इस साल नवंबर में इस पद से हटने की उम्मीद है।
IPO को बताया जा रहा है संभावित समाधान
टाटा संस की संभावित IPO योजना को भी समूह के मौजूदा ढांचे और ट्रस्ट्स के नियंत्रण से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा संस के चेयरमैन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के बीच समय-समय पर सामने आने वाले मतभेदों ने समूह के कॉर्पोरेट ढांचे को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कुछ ट्रस्टियों का मानना है कि IPO कंपनी और उसके प्रमुख शेयरधारकों के बीच संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने का एक रास्ता हो सकता है। हालांकि, टाटा संस की IPO योजना और नेतृत्व में बदलाव को लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
टाटा समूह में हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर नेतृत्व, उत्तराधिकार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चर्चा तेज कर दी है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल के बाद समूह की कमान किसके हाथ में जाएगी, इस पर अब सभी की नजरें हैं।













