National Desk: महाराष्ट्र में इस साल आम प्रेमियों और किसानों को बड़ा झटका लगा है। मशहूर अल्फांसो आम की करीब 90 प्रतिशत फसल खराब मौसम और भीषण गर्मी की वजह से बर्बाद हो गई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय तनाव और निर्यात में आई बाधाओं ने आम कारोबार को भी गहरी चोट पहुंचाई है।
महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र, खासकर देवगढ़, अल्फांसो आम के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं। लेकिन इस बार दिसंबर और जनवरी में तापमान में असामान्य बदलाव के कारण आम के पेड़ों पर आए बौर टिक नहीं पाए। इसके बाद अप्रैल और मई की तेज गर्मी ने बची हुई फसल को भी भारी नुकसान पहुंचाया। कृषि अधिकारियों के अनुसार अल नीनो के प्रभाव के चलते देवगढ़ क्षेत्र में 85 से 90 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो चुकी है।
इस संकट का असर सीधे किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। कई बाग मालिकों को ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करने के लिए दूसरे इलाकों से आम खरीदने पड़ रहे हैं। उत्पादन घटने से आम की गुणवत्ता और सप्लाई दोनों प्रभावित हुई हैं, जिससे पूरे बाजार का संतुलन बिगड़ गया है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। देश में हर साल करोड़ों डॉलर के ताजे आम और मैंगो पल्प का निर्यात किया जाता है। लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय हालात ने व्यापार को और मुश्किल बना दिया है। ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, कुवैत और कतर जैसे देशों में निर्यात प्रभावित हुआ है।
निर्यातकों के अनुसार माल ढुलाई का खर्च दोगुने से ज्यादा बढ़ गया है, जबकि कई शिपमेंट देरी या रद्द हो रहे हैं। इससे व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। निर्यात के लिए तैयार आम अब स्थानीय बाजारों में बेचना पड़ रहा है, जिसके कारण बाजार में कीमतों में अपेक्षित तेजी भी नहीं देखने को मिल रही।
आम के कारोबार से जुड़े दूसरे उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। मालवण क्षेत्र में आम की पेटियां बनाने वाले कारोबारियों के पास बड़ी संख्या में खाली कार्टन पड़े हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से आम और मछली पालन पर निर्भर है। ऐसे में आम के कारोबार में गिरावट से मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर भी संकट गहरा गया है।













