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‘कचौड़ी गली’ गीत फिर चर्चा में, Rekha Bhardwaj की आवाज ने पुराने दर्द को किया ताजा

25 May 2026 Fact Recorder

Bollywood Desk:  करीब 95 साल पुराना भोजपुरी लोकगीत “कचौड़ी गली सून कईले बलमू” एक बार फिर लोगों की जुबान पर छा गया है। मशहूर गायिका Rekha Bhardwaj ने इसे नए अंदाज में गाकर फिर से जीवंत कर दिया है। Coke Studio Bharat के लिए रिकॉर्ड किया गया यह गीत रिलीज होते ही सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है।

गीत में बनारस, विरह और लोकसंगीत की गहरी छाप देखने को मिलती है। “मिर्जापुर कईले गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कईले बलमू” जैसे बोल दशकों से भोजपुरी संस्कृति और कजरी गायन का अहम हिस्सा रहे हैं। सावन के मौसम में झूला गीतों के रूप में भी इसे खूब गाया जाता रहा है।

कहा जाता है कि इस गीत की शुरुआत 1930-40 के दशक में हुई थी। इसे बनारस की प्रसिद्ध गायिका और तवायफ Gauhar Jaan से जोड़ा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, उन्होंने अपने स्वतंत्रता सेनानी प्रेमी के बिछड़ने के दर्द में यह गीत गाया था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके प्रेमी को गिरफ्तार कर रंगून भेज दिया गया था, जिसके बाद विरह की पीड़ा इस गीत के बोलों में उतर आई।

इस गीत को समय-समय पर कई कलाकारों ने अपनी आवाज दी। भारत रत्न Ustad Bismillah Khan ने भी अपनी शहनाई की धुन से इसे नई पहचान दिलाई। वहीं लोकगायिका Malini Awasthi ने भी इसे मंचों पर लोकप्रिय बनाया।

अब रेखा भारद्वाज ने उत्पल उदित और ख्वाब के साथ मिलकर इस क्लासिक गीत को आधुनिक संगीत के साथ पेश किया है। उनकी आवाज और लोकधुनों के मेल ने नई पीढ़ी को भी इस पुराने गीत से जोड़ दिया है।

बनारस की गलियों से जुड़ी है गीत की पहचान

Varanasi की कचौड़ी गली कभी संगीत और संस्कृति का बड़ा केंद्र मानी जाती थी। इसी इलाके में जन्मी Gauhar Jaan को भारतीय संगीत इतिहास की पहली महिला सुपरस्टार भी कहा जाता है। उन्होंने ग्रामोफोन पर अपनी आवाज रिकॉर्ड कराकर इतिहास रचा था।

आज भी “कचौड़ी गली” गीत लोकसंगीत प्रेमियों के बीच खास जगह रखता है और हर नए अंदाज के साथ इसकी लोकप्रियता फिर लौट आती है।