10अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: भारत और ईरान के बीच मजबूत होते रिश्तों के बीच चाबहार पोर्ट को ‘दोस्ती का गोल्डन ब्रिज’ बताया गया है। भारत में ईरानी दूतावास ने इस बंदरगाह की तस्वीरें साझा करते हुए इसे दोनों देशों के सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव के बाद बातचीत का दौर जारी है। इस बीच चाबहार पोर्ट को लेकर ईरान का यह संदेश साफ करता है कि भारत के साथ उसकी आर्थिक साझेदारी मजबूत बनी हुई है।
दरअसल, मई 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 साल का एक अहम समझौता हुआ था। इसके तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड को शहीद बहेश्ती टर्मिनल के संचालन, उपकरण स्थापना और विकास की जिम्मेदारी दी गई। भारत इस परियोजना में करीब 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये) का निवेश कर चुका है।
चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच बनाने का एक अहम रास्ता है, जिससे पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है। यही कारण है कि यह पोर्ट भारत की कनेक्टिविटी और व्यापार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट International North-South Transport Corridor (INSTC) का भी अहम हिस्सा है, जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के रिश्तों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार और कूटनीति में भी अहम भूमिका निभाएगा।













