2 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: Dr. Bhimrao Ambedkar का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान थे। उनके पिता रामजी सकपाल फौज में सूबेदार थे और शिक्षा के महत्व को समझते थे, इसलिए उन्होंने भीमराव को उच्च शिक्षा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंबेडकर ने अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी में राजनीतिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास और विधि का गहन अध्ययन किया और अपने विचारों से भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला।
डॉ. अंबेडकर एक महान लेखक और चिंतक थे। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘जाति का विनाश’, ‘बुद्ध और उनका धम्म’, ‘शूद्र कौन थे?’ जैसी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और भेदभाव की कड़ी आलोचना की और इसे सामाजिक प्रगति में बाधा बताया। उनके अनुसार, यह व्यवस्था समाज को विभाजित करती है और व्यक्ति की उन्नति को रोकती है।
भारतीय संविधान के निर्माण में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उन्होंने हर नागरिक को समान अधिकार, मतदान का अधिकार और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया। उनके प्रयासों से लोकतंत्र मजबूत हुआ और समाज के हर वर्ग को आवाज मिली।
स्वतंत्रता से पहले दलितों और वंचित वर्गों की स्थिति बेहद दयनीय थी। उन्हें सामाजिक, आर्थिक और कानूनी स्तर पर भेदभाव का सामना करना पड़ता था। डॉ. अंबेडकर ने इन वर्गों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया और उन्हें सम्मानजनक जीवन दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने मजदूरों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जैसे काम के घंटे 14 से घटाकर 8 करना, महंगाई भत्ता लागू करना, मातृत्व अवकाश, भविष्य निधि और न्यूनतम मजदूरी जैसी व्यवस्थाएं लागू करवाना। उन्होंने महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की।
महिलाओं के अधिकारों के लिए उन्होंने हिंदू कोड बिल का प्रस्ताव रखा, जिसमें संपत्ति में समान अधिकार और तलाक जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। जब यह बिल स्वीकार नहीं हुआ, तो उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जो उनके सिद्धांतों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता की मिसाल है। उनका संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—आज भी समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने न केवल संविधान दिया, बल्कि एक ऐसा सामाजिक ढांचा तैयार किया जिसमें हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिल सके।













