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5 प्राथमिकताएं, एक मिशन: पंजाब को नशा-मुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का ‘बिग 5’ अभियान

पुलिस कार्रवाई से लेकर गांवों की निगरानी तक, स्कूलों से लेकर नशा-मुक्ति केंद्रों तक: भगवंत मान सरकार की नशों के खिलाफ व्यापक मुहिम

‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’: भगवंत मान सरकार द्वारा नशों की आपूर्ति पर रोक लगाकर रोकथाम, रिपोर्टिंग और इलाज पर जोर

चंडीगढ़, 21 सितंबर 2026 Fact Recorder

Punjab Desk:  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब में चलाई जा रही ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम अब केवल पारंपरिक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि नशों के खिलाफ पंच-सूत्रीय व्यापक रणनीति के रूप में आगे बढ़ रही है। इसके तहत पुलिस, अध्यापक, सामुदायिक वॉलंटियर, नौजवान और स्वास्थ्य कर्मचारी मिलकर नशों की आपूर्ति के नेटवर्क पर कार्रवाई करने, नशों की रोकथाम करने, रिपोर्टिंग प्रणाली को मजबूत करने और नशों की समस्या से जूझ रहे लोगों को समय पर इलाज मुहैया करवाने के लिए काम कर रहे हैं।

संदेश स्पष्ट है: पंजाब नशों के खिलाफ लड़ाई केवल थानों से नहीं लड़ेगा। यह लड़ाई अब गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, समुदायों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रही है। जहां पुलिस नशों की आपूर्ति के नेटवर्क को तोड़ने और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुटी हुई है, वहीं सामुदायिक प्रतिनिधि जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत कर रहे हैं। अध्यापक नौजवानों के नशों की गिरफ्त में आने से पहले ही खतरे के संकेतों की पहचान करने में मदद कर रहे हैं, जबकि नौजवानों द्वारा किशोरों और नौजवानों में नशों के खिलाफ जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन-शैली को प्रोत्साहित किया जा रहा है, स्वास्थ्य कर्मचारी नशों की समस्या से जूझ रहे लोगों को इलाज और सुधार की ओर जाने का रास्ता मुहैया करवा रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य नशा बेचना मुश्किल बनाना, नशा तस्करी की सूचना देना आसान करना, नौजवानों को नशों की दलदल में फंसने से रोकना और नशों की लत से जूझ रहे लोगों के लिए इलाज हासिल करना आसान बनाना है। यह पंच-सूत्रीय रणनीति इन्फोर्समेंट और रोकथाम के साथ-साथ पुनर्वास को भी बराबर महत्व देती है और यह दर्शाती है कि नशों के खिलाफ लगातार जंग के लिए समाज के हर स्तर की भागीदारी जरूरी है।

पुलिस कार्रवाई: नशों की आपूर्ति चेन को तोड़ना

‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम को प्रभावशाली ढंग से लागू करने में पुलिस की अहम भूमिका है। मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक पंजाब की एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने 61,824 एफआईआर दर्ज कीं और 81,433 लोगों को गिरफ्तार किया।

इस मुहिम की शुरुआत से अब तक बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं, इनमें 3918 किलोग्राम हेरोइन, 991 किलोग्राम अफीम, 47 टन भूक्की, 1416 किलोग्राम गांजा और 65 लाख गोलियां तथा कैप्सूल शामिल हैं।

इसी समय के दौरान, पंजाब पुलिस द्वारा 79,293 लोक मीटिंगें की गईं। इनके जरिए नशों के खिलाफ मुहिम को सीधे तौर पर समुदायों तक पहुंचाया गया और नशों के खिलाफ लड़ाई में आम लोगों की भागीदारी को मजबूत किया गया।

अध्यापक: नशों की लत लगने से पहले ही रोकथाम

‘बिग 5’ का दूसरा स्तंभ रोकथाम पर केंद्रित है, क्योंकि नशों के खिलाफ लड़ाई उस समय शुरू नहीं हो सकती जब कोई नौजवान पहले ही नशों की लत का शिकार हो चुका हो।

प्रशिक्षित अध्यापकों द्वारा 3,600 स्कूलों में 7.5 लाख विद्यार्थियों को 14 हफ्तों का नशा-विरोधी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। सरकार द्वारा सभी हाई स्कूल और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के अध्यापकों को चरणबद्ध ढंग से जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, नशों की ओर बढ़ने के खतरे और समय पर हस्तक्षेप के तरीकों के शुरुआती संकेतों की पहचान की जा सके।

पहले चरण में 13 जिलों के लगभग 25,000 अध्यापकों को प्रशिक्षण देने की योजना है। अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में 7,000 अध्यापकों को पहले ही जागरूक किया जा चुका है।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अध्यापक केवल क्लासरूम तक सीमित न रहें, बल्कि नशों के खिलाफ एक अतिरिक्त सुरक्षा कड़ी के रूप में भी काम करें, वे नशों के शुरुआती लक्षणों की पहचान करें और जरूरतमंद विद्यार्थियों को योग्य सहायता से जोड़ने में सक्षम हों।

नौजवान और साथी नेटवर्क: नशों के आसपास के सामाजिक माहौल में बदलाव

तीसरा स्तंभ नशे के इस्तेमाल के सबसे कठिन पहलू साथियों के प्रभाव और सामाजिक स्वीकृति पर केंद्रित है।

इस पहल के तहत स्कूलों और कॉलेजों के कार्यक्रमों में साथी भागीदारी, नशों की लत से उबर चुके लोगों की शिरकत और नौजवानों की अगुवाई वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि नौजवानों के लिए नशों को ‘ना’ कहना सामाजिक तौर पर आसान बनाया जा सके और इस सुधार को कलंक न माना जाए।

स्कूलों के लिए साल भर की गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किए गए हैं ताकि विद्यार्थी जुड़े रहें, जबकि सांस्कृतिक त्योहार, मानसिक स्वास्थ्य क्लब और खेल गतिविधियां कॉलेज के विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन शैली चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

रणनीति स्पष्ट है: नशों के खिलाफ लड़ाई केवल नौजवानों को यह बता कर नहीं जीती जा सकती कि उन्हें क्या नहीं करना चाहिए। पंजाब खेलों, संस्कृति, साथी भागीदारी और सामुदायिक भागीदारी के जरिए नौजवानों के लिए बेहतर और स्वस्थ विकल्प तैयार कर रहा है।

सामुदायिक निगरानी: लड़ाई को जमीनी स्तर तक ले जाना

चौथा स्तर नशों के खिलाफ मुहिम में आम नागरिकों की भूमिका को मजबूत करता है।

इस मुहिम ने जमीनी स्तर पर एक मजबूत निगरानी नेटवर्क तैयार किया है। सितंबर 2026 तक, लगभग 1.25 लाख सदस्य करीब 15,000 गांव और वार्ड रक्षा कमेटियों से जुड़ चुके हैं। ये कमेटियां पंजाब के गांवों और शहरी वार्डों तक नशों के खिलाफ निगरानी प्रबंध को मजबूत कर रही हैं।

50,000 से अधिक गांव और वार्ड रक्षा कमेटी सदस्यों को ‘नशा मुक्ति ऐप’ के इस्तेमाल बारे प्रशिक्षण दिया जा चुका है, सामुदायिक प्रतिनिधि न केवल नशा तस्करी से संबंधित जानकारी मुहैया करवा रहे हैं, बल्कि नशों की समस्या से जूझ रहे लोगों की मदद की जरूरत बारे भी जानकारी दे रहे हैं, जिससे सरकारी अधिकारियों को सही समय पर हस्तक्षेप करने के सक्षम बनाया जा रहा है।

1 मार्च, 2025 को शुरू की गई सेफ पंजाब व्हाट्सएप हेल्पलाइन 97791-00200 के जरिए नागरिकों से अब तक 51,000 से अधिक सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, इन सूचनाओं की मदद से पुलिस ने नशों से संबंधित मामलों में 25,000 से अधिक गिरफ्तारियां की हैं।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नशा तस्कर लुक-छिपकर अपनी गतिविधियां न चला सकें और नशों की समस्या से जूझ रहे परिवार सरकारी सहायता प्राप्त करने से वंचित न रहें।

स्वास्थ्य और पुनर्वास: नशों से बाहर निकलने का रास्ता

पांचवां स्तंभ यह मानता है कि केवल इन्फोर्समेंट के जरिए नशों की समस्या का हल नहीं किया जा सकता। इसलिए पंजाब ने इलाज से संबंधित बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है, ताकि नशों की समस्या से जूझ रहे लोगों को इससे उबरने के लिए आसानी से इलाज और सहायता मिल सके।

इस समय पंजाब में 547 ओ.ओ.ए.टी. केंद्र, 219 नशा-मुक्ति केंद्र और 91 पुनर्वास केंद्र हैं।

‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम की शुरुआत के बाद सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है, स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है और इलाज केंद्रों में मरीजों को रिकवरी के दौरान सक्रिय रखने के लिए हुनर विकास और रचनात्मक गतिविधियां शुरू की गई हैं।

इलाज और नशों से जुड़े सामाजिक कलंक को घटाने पर बढ़ते जोर के नतीजे के तौर पर संस्थागत इलाज के लिए आने वाले लोगों की गिनती में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।

सरकारी नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में दाखिल होने वाले लोगों की गिनती साल 2024 में 12,200 से अधिक थी, जो साल 2025 में बढ़कर लगभग 34,000 हो गई, यानी इसमें 170 फीसदी से अधिक वृद्धि हुई।

यह आंकड़े एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं: सालों से नशों की समस्या से जूझ रहे लोग अब सरकारी केंद्रों में इलाज करवाने के लिए आगे आ रहे हैं।

बिग 5: नशों के खिलाफ एकजुट लड़ाई

यही ‘बिग 5’ की मुख्य सोच है: इन्फोर्समेंट अकेला काम नहीं कर सकता और आसान तरीके से उपलब्ध इलाज के बिना रोकथाम भी सफल नहीं हो सकती।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें पुलिस थाने, गांव, स्कूल, कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्र अब अलग-अलग मोर्चे नहीं रहे, बल्कि नशों के खिलाफ एक ही मुहिम के आपस में जुड़े हुए हिस्से हैं।

रिपोर्टिंग को मजबूत करना, नौजवानों को नशों से बचाना, समुदायों को सक्रिय करना और नशों से बाहर निकलने के लिए भरोसेमंद इलाज और पुनर्वास की सुविधा मुहैया करवाना।

भगवंत मान सरकार के लिए नशों के खिलाफ लड़ाई केवल नारों या बयानों तक सीमित नहीं है। यह जमीनी स्तर पर नशों के खिलाफ जंग लड़ने और इसे बरकरार रखने के लिए जरूरी ढांचे, जमीनी नेटवर्क, रोकथाम प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवा क्षमता विकसित करने बारे है।