October 27,2026 Fact Recorder
Education Desk: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय के पुराने इतिहास पर भी नजरें टिक गई हैं। जामिया में आखिरी बार 2005 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 31 मार्च 2006 को छात्रसंघ भंग कर दिया गया। इसके बाद चुनाव बहाल नहीं हो सके।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जामिया में छात्रसंघ को क्यों भंग किया गया था? कौन थे छात्रसंघ के आखिरी अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी? आइए, जानते हैं जामिया के छात्रसंघ चुनाव का पूरा इतिहास।
1981 में हुआ था पहला छात्रसंघ चुनाव
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई थी। बाद में इसे दिल्ली के करोलबाग में स्थानांतरित किया गया और 1935-36 में ओखला स्थित मौजूदा परिसर में इसकी स्थापना हुई। वर्ष 1988 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
विश्वविद्यालय में पहला छात्रसंघ चुनाव 1981 में आयोजित किया गया था। इस चुनाव में जुबैर खान अध्यक्ष चुने गए थे। वहीं, रिजवान अली खानी उपाध्यक्ष, आफताब अहमद महासचिव और जलालुद्दीन संयुक्त सचिव निर्वाचित हुए थे।
1996 में छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक
जामिया में छात्रसंघ चुनाव का सिलसिला लगातार जारी नहीं रह सका। वर्ष 1996 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव पर रोक लगा दी थी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रसंघ के पदाधिकारी विद्यार्थियों के दाखिले, हॉस्टल में सीटों के आवंटन और अन्य प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप करने लगे थे। इससे विश्वविद्यालय के कामकाज पर असर पड़ने की बात सामने आई थी। इसके बाद छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
2005 में चुनाव हुए, लेकिन एक साल से पहले भंग हुआ छात्रसंघ
छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग के बीच वर्ष 2005 में करीब नौ साल बाद जामिया में चुनाव आयोजित किए गए। जुलाई 2005 में नए पदाधिकारी चुने गए, लेकिन छात्रसंघ अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।
31 मार्च 2006 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ को भंग कर दिया। इसके साथ ही चुनाव पर रोक फिर जारी रही।
हिंसक घटनाओं के बाद लिया गया था फैसला
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ को भंग करने के पीछे परिसर में हुई हिंसक घटनाओं और पढ़ाई में पड़ रहे व्यवधान का हवाला दिया था। बताया जाता है कि छात्रसंघ को भंग करने से पहले विश्वविद्यालय दो दिनों तक बंद भी रहा था।
मई 2012 में राज्यसभा में दिए गए एक जवाब में भी विश्वविद्यालय की ओर से हिंसक घटनाओं के बाद छात्रसंघ भंग किए जाने की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन कुलपति पर हमला भी इन घटनाओं में शामिल था।
इसके बाद जामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं हो सके। वर्ष 2017 में छात्रसंघ चुनाव के विकल्प के तौर पर विषय संघ और विषय प्रतिनिधियों के चुनाव की व्यवस्था का प्रस्ताव सामने आया। इसके बाद विषय प्रतिनिधियों के चुनाव की व्यवस्था जारी रही।
कौन थे जामिया छात्रसंघ के आखिरी पदाधिकारी?
2005 में हुए चुनाव में निर्वाचित पदाधिकारियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:
- अध्यक्ष: शम्स परवेज
- उपाध्यक्ष: मुहम्मद फहीम हैदर खान
- महासचिव: फरहत अली
- संयुक्त सचिव: जिल्ले सुभानी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शम्स परवेज वर्तमान में बिहार की पूर्णिया यूनिवर्सिटी के अंतर्गत अररिया कॉलेज में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। अन्य पदाधिकारियों की वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
फिर क्यों चर्चा में आया छात्रसंघ चुनाव?
छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर जामिया में फिर आंदोलन शुरू हुआ है। छात्र चुनाव की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव कराने की घोषणा की खबर सामने आई है।
करीब दो दशक से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण यह मुद्दा विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और छात्र हितों से जुड़ी बहस का हिस्सा बना हुआ है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि चुनाव की प्रक्रिया कब और किस तरह पूरी होती है।











