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ईरान की मदद के आरोप में भारत की कंपनी पर अमेरिकी कार्रवाई, महान एयर से जुड़े होने पर लगाया प्रतिबंध

31 July 2026 Fact Recorder 

International Desk: अमेरिका ने ईरान की एयरलाइन महान एयर को कथित समर्थन देने के आरोप में भारत की एक कंपनी समेत छह संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी विभाग) का आरोप है कि इन संस्थाओं ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसकी कुद्स फोर्स को वित्तीय, लॉजिस्टिक और व्यावसायिक सहायता उपलब्ध कराई।

प्रतिबंधित संस्थाओं में भारत की स्काइज ट्रैवल्स एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है, जिसके कार्यालय श्रीनगर और नई दिल्ली में हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कंपनी वर्ष 2020 से ईरानी एयरलाइन महान एयर की जनरल सेल्स एजेंट (GSA) के रूप में कार्य कर रही थी और उसके व्यावसायिक संचालन में सहयोग कर रही थी।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था IRGC या महान एयर को वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक सहायता या अन्य व्यावसायिक सहयोग प्रदान करती है, वह एक प्रतिबंधित संगठन की सहायता करती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसी संस्थाओं की पहचान कर उन्हें वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग करने की कार्रवाई जारी रखेगा।

अमेरिका का आरोप है कि महान एयर खुद को एक नागरिक विमानन कंपनी के रूप में पेश करती है, लेकिन लंबे समय से वह IRGC और उसकी कुद्स फोर्स की गतिविधियों में सहयोग करती रही है। ट्रेजरी विभाग के मुताबिक एयरलाइन ने कथित तौर पर सैन्य कर्मियों की आवाजाही, ड्रोन और हथियारों के परिवहन सहित कई गतिविधियों में सहायता की है। इन्हीं आरोपों के चलते अमेरिका पहले भी महान एयर पर कई प्रतिबंध लगा चुका है।

इस कार्रवाई में चीन और रूस की कुछ कंपनियां भी शामिल हैं। इनमें चीन की शंघाई विंग्स इंटरनेशनल लॉजिस्टिक कंपनी, शंघाई एलीट इंटरनेशनल ट्रैवल कंपनी, रूस की कार्गो प्राइवेट लिमिटेड और चीन के नागरिक तांग ज़न पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा डाडेनेगर स्टार्टअप स्टूडियो को भी IRGC से जुड़ी कथित फ्रंट कंपनी बताते हुए प्रतिबंधित किया गया है।

इन प्रतिबंधों के बाद संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज कर दी जाएंगी। साथ ही अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए इनके साथ किसी भी प्रकार का कारोबार या वित्तीय लेनदेन प्रतिबंधित रहेगा। इन प्रतिबंधों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेनदेन पर भी पड़ सकता है।