20 July 2026 Fact Recorder
Rashifal Desk आज सोमवार, 20 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो 21 जुलाई प्रातः 4:02 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। सोमवार का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक शिव पूजा करने से चंद्र दोष शांत होता है, मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पंचांग के अनुसार आज हस्त नक्षत्र, शिव योग, गर करण और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। चंद्रमा कन्या राशि में तथा सूर्य कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। आज अभिजीत मुहूर्त, अमृत काल और रवि योग जैसे कई शुभ संयोग महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उत्तम माने गए हैं।
- तिथि: शुक्ल सप्तमी (21 जुलाई प्रातः 4:02 बजे तक), इसके बाद अष्टमी
- वार: सोमवार
- नक्षत्र: हस्त (शाम 7:09 बजे तक), फिर चित्रा
- योग: शिव योग (शाम 6:37 बजे तक), इसके बाद सिद्ध योग
- करण: गर (दोपहर 3:40 बजे तक), फिर वणिज
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- चंद्र राशि: कन्या
- सूर्य राशि: कर्क
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
- सूर्योदय: सुबह 5:37 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:19 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 11:37 बजे
- चंद्रास्त: रात 11:05 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 4:15 AM – 4:56 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 12:01 PM – 12:56 PM
- विजय मुहूर्त: 2:45 PM – 3:40 PM
- अमृत काल: 12:55 PM – 2:35 PM
- रवि योग: 11:34 AM – 7:09 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 7:18 PM – 7:39 PM
- निशिता मुहूर्त: 21 जुलाई, 12:08 AM – 12:49 AM
आज के अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: सुबह 7:20 बजे से 9:03 बजे तक
- यमगण्ड: 10:45 बजे से 12:28 बजे तक
- गुलिक काल: 2:11 बजे से 3:54 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: 12:56 बजे से 1:50 बजे तक
- भद्रा: 21 जुलाई प्रातः 4:02 बजे से 5:37 बजे तक
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
सोमवार को करें शिव-पार्वती की पूजा
सोमवार भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का विशेष दिन माना जाता है। सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन, अक्षत और मौसमी फल अर्पित करें।
माता पार्वती को लाल या पीले पुष्प, सुहाग सामग्री और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ पार्वत्यै नमः” मंत्रों का जप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।
प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व
सोमवार के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस समय दीप प्रज्ज्वलित कर शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें तथा बेलपत्र अर्पित कर शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख, शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है।













