26 May 2026 Fact Recorder
National Desk: Jharkhand में आदिवासी पहचान, संस्कृति और सरना-सनातन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली में आयोजित जनजातीय समागम के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। कार्यक्रम में झारखंड से बड़ी संख्या में आदिवासी युवाओं की भागीदारी और सोशल मीडिया पर “सरना और सनातन एक हैं” जैसे नारों को मिली प्रतिक्रिया ने राष्ट्रवादी संगठनों को नई ऊर्जा दी है।
Rashtriya Swayamsevak Sangh से जुड़ी संस्था Vanvasi Kalyan Ashram के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रफुल्ल अकांत ने कहा कि आदिवासी समाज अब औपनिवेशिक सोच और मिशनरियों के प्रभाव को समझने लगा है। उनके अनुसार, लंबे समय तक आदिवासी समाज का शोषण किया गया, लेकिन अब युवा अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आगे आ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं, जिसके खिलाफ अब युवाओं में जागरूकता बढ़ रही है। उनका कहना है कि आने वाले समय में जनजातीय सांस्कृतिक मुद्दों पर आवाज और अधिक मुखर होगी।
दिल्ली में हुए इस समागम में पूर्व मुख्यमंत्री Arjun Munda और Champai Soren भी शामिल हुए थे। भाजपा में शामिल होने के बाद से चंपाई सोरेन लगातार अवैध मतांतरण और मिशनरियों के प्रभाव का मुद्दा उठाते रहे हैं।
वहीं Babulal Marandi पहले भी सरना और सनातन एकता की बात कर चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंपाई सोरेन जैसे बड़े आदिवासी नेता का इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।













