24 July 2026 Fact Recorder
National Desk: देशभर में पेपर लीक के मामलों और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार इस संशोधित विधेयक को अगले सप्ताह संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है।
संशोधित कानून में पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, अपराध सिद्ध होने पर 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा। इसके अलावा मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी अधिकार दिए जाएंगे, ताकि जांच और फैसला तीन महीने के भीतर पूरा किया जा सके।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता पर जोर
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इससे पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने और छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था लाने की बात कही थी।
आंदोलनकारी छात्रों से भी सरकार की वार्ता
इधर, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक भी हुई।
बैठक में CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें उठाईं।
दोहरी रणनीति पर काम कर रही सरकार
सरकार एक ओर आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। सरकार का मानना है कि संशोधित कानून लागू होने के बाद पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।













