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सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, छह शहरों में अलर्ट; तेल पाइपलाइन प्रभावित होने से बढ़ी वैश्विक चिंता

September 15,2026 Fact Recorder

International Desk:  यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद नागरिकों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

छह शहरों के लिए जारी हुआ अलर्ट

सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने ताइफ, जेद्दा, अबहा, अल-उला, जाज़ान और यानबू के लिए चेतावनी जारी की। लोगों से शांत रहने, सरकारी निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई।

सोमवार को हुए हमलों में 13 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कई घरों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है।

हूतियों ने एयरबेस को निशाना बनाने का किया दावा

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि दक्षिणी सऊदी अरब के खमीस मुशैत स्थित किंग खालिद एयर बेस पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन दागे गए। उनके मुताबिक, हमले में विमान हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के डिपो को निशाना बनाया गया।

हालांकि, सऊदी सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने एयरबेस को हुए नुकसान की पुष्टि नहीं की। उन्होंने बताया कि खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ में नागरिक इलाकों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। इन हमलों में 13 लोगों को मामूली से मध्यम चोटें आईं और सात घरों तथा दो वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई।

लाल सागर के रणनीतिक द्वीपों पर भी बढ़ी हूतियों की पकड़

हूतियों ने लाल सागर में ग्रेटर हनिश और लेसर हनिश द्वीपों पर कब्जे का दावा किया है। ये द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित हैं। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को खुले समुद्र से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हूतियों की इस बढ़ती पकड़ से क्षेत्र में उनका रणनीतिक प्रभाव और मजबूत होने की आशंका है। इससे पहले मोखा बंदरगाह शहर और मायून द्वीप पर भी उनके नियंत्रण की खबरें सामने आई थीं।

सऊदी की तेल पाइपलाइन को नुकसान, मरम्मत में लग सकते हैं कई सप्ताह

ड्रोन हमले में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की खबर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है।

क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन को पूरी क्षमता से बहाल करने में तीन से पांच सप्ताह तक का समय लग सकता है। मरम्मत के दौरान पाइपलाइन आंशिक रूप से काम कर सकती है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता कितनी रहेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

तेल की कीमतों में तेजी

रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, अगस्त के अंत से इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था। यदि इसका संचालन पूरी तरह बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

पाइपलाइन पर हमले की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई और ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। लंबे समय तक पाइपलाइन बाधित रहने पर सऊदी अरब को तेल निर्यात के वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे परिवहन लागत और आपूर्ति का समय बढ़ सकता है।

होर्मुज और बाब अल-मंदेब, दोनों मोर्चों पर चुनौती

सऊदी अरब को पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव के कारण तेल निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अब बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

हमलों के कारण कई टैंकरों ने लाल सागर के रास्ते के बजाय वैकल्पिक मार्ग अपनाना शुरू कर दिया है। इससे एशियाई बाजारों तक सऊदी तेल पहुंचाने में समय और खर्च दोनों बढ़ने की आशंका है।

यमन में भी बढ़ रही हिंसा

यमन में भी हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है। कुछ समय तक अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा बढ़ी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। हूतियों ने तटीय इलाकों के अलावा ताइज़ प्रांत में भी हमले तेज कर दिए हैं।

सऊदी शहरों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले, लाल सागर में बढ़ता सैन्य तनाव और महत्वपूर्ण तेल बुनियादी ढांचे को नुकसान अब सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।