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महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल, सांसदों के बाद विधायकों के भी शिंदे गुट के संपर्क में होने का दावा

19 June 2026 Fact Recorder

National Desk:  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के बागी रुख की खबरों के बीच अब विधायकों के भी उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के संपर्क में होने के दावे सामने आ रहे हैं। इससे Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाले ठाकरे गुट की चिंताएं बढ़ गई हैं।

शिंदे गुट के विधायक Bacchu Kadu ने दावा किया है कि सांसदों के बाद कुछ विधायक भी जल्द ही नया राजनीतिक फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधि भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज

पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि ठाकरे गुट के कुछ सांसदों ने अलग रुख अपनाया है और भविष्य में शिंदे गुट के साथ जाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।

हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिर भी इन अटकलों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

16 विधायकों के संपर्क में होने का दावा

शिंदे गुट के नेताओं की ओर से पहले भी यह दावा किया गया था कि ठाकरे गुट के कई विधायक और सांसद उनके संपर्क में हैं। कुछ नेताओं ने 16 विधायकों तक के संपर्क में होने की बात कही थी, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ठाकरे गुट ने बढ़ाई सक्रियता

राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच उद्धव ठाकरे ने पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि यह बैठक संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और संभावित असंतोष को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

वहीं, राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने बागी रुख अपनाने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शिंदे गुट की आलोचना की है।

मानसून सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में किसी भी विधायक या सांसद की ओर से औपचारिक रूप से पाला बदलने की घोषणा होती है, तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल अधिकांश दावे राजनीतिक बयानबाजी और अटकलों के स्तर पर हैं।

ऐसे में राज्य के आगामी मानसून सत्र से पहले होने वाले घटनाक्रमों पर सभी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।