20 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: महिला आरक्षण बिल को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि यह सत्र केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस का मंच बनेगा।
राज्य सरकार इस सत्र के जरिए महिला आरक्षण पर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी और विपक्ष पर निशाना साधेगी। साथ ही इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
नियमों के मुताबिक, सत्र बुलाने से कम से कम सात दिन पहले सदस्यों को सूचना देना जरूरी होता है। इसी वजह से रविवार को राज्य कैबिनेट ने बाई सर्कुलेशन के जरिए प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब यह प्रस्ताव सोमवार को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सत्र के दौरान विपक्ष के रवैये को लेकर निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष महिला आरक्षण के मुद्दे पर लगातार विरोध कर रहा है, जबकि विपक्ष सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगा रहा है।
सरकार का मानना है कि महिला आरक्षण पर उसकी सकारात्मक सोच को जनता तक पहुंचाने का यह सही समय है। वहीं विपक्ष का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।
ऐसे में 30 अप्रैल का विशेष सत्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुकाबला साबित हो सकता है, जहां दोनों पक्ष जनता के सामने अपनी-अपनी रणनीति और संदेश रखने की कोशिश करेंगे।













