September 08,2026 Fact Recorder
National Desk: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर राजधानी में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की सिफारिश की है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में छात्रों के लिए बने PG और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने मामले को लेकर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में दिल्ली में छात्रों के रहने वाले भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच कराने की जरूरत बताई गई है।
दोपहर 2 बजे हो सकती है सुनवाई
एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की है। जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर दोपहर करीब 2 बजे सुनवाई हो सकती है।
रिपोर्ट में अप्रैल 2022 में सत्य निकेतन में हुई एक अन्य इमारत गिरने की घटना का भी जिक्र किया गया है। उस हादसे में 2 लोगों की मौत और 4 लोग घायल हुए थे।
सभी PG और निजी हॉस्टलों के ऑडिट की सिफारिश
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित सभी PG, निजी हॉस्टलों और छात्रों के रहने वाले अन्य परिसरों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सत्य निकेतन के P-14 में 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत ढह गई थी। इस भवन में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं और इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze’ नाम से बॉयज PG के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
बार-बार हो रहे हादसों पर उठे सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है और छात्रों के रहने के लिए एक प्रमुख इलाका बन चुका है। यहां बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल, मेस, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं।
इलाके में पहले भी इमारत गिरने की घटना सामने आ चुकी है। अप्रैल 2022 के हादसे में दो लोगों की जान गई थी। ऐसे में दोबारा इमारत गिरने की घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या भवनों की नियमित जांच, खतरनाक इमारतों की पहचान और सुरक्षा नियमों को लागू करने की व्यवस्था पर्याप्त है।
किन सुरक्षा मानकों की होगी जांच?
रिपोर्ट में छात्रों के आवास वाले भवनों की सुरक्षा जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल करने की जरूरत बताई गई है। इनमें—
- भवन का स्वीकृत नक्शा और निर्माण की वैधता
- बेसमेंट और भवन का सही उपयोग
- जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियम
- इमारत की संरचनात्मक मजबूती
- फायर सेफ्टी इंतजाम
- आपातकालीन निकासी के रास्ते
- भवन निर्माण नियमों का पालन
जैसे बिंदुओं की जांच शामिल है।
सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर राजधानी में छात्रों के लिए सुरक्षित और नियमानुसार आवास उपलब्ध कराने की जरूरत को सामने ला दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे आने वाले निर्देशों पर सभी की नजरें टिकी हैं।













