Home Himachal सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच देश की शक्तिः राज्यपाल

सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच देश की शक्तिः राज्यपाल

शिमला 10 जुलाई, 2026 Fact Recorder

Himachal Desk:  राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि भारतीय संघीय व्यवस्था के भी मजबूत समर्थक थे। उन्होंने कहा कि भारत का संघीय ढांचा दुनिया में अनोखा है, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं संविधान के माध्यम से एक सूत्र में बंधी हुई हैं जो देश की एकता की मजबूत नींव है।
राज्यपाल आज भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सरदार पटेल की दृष्टि, एकीकरण, एकात्मता और संघवाद की परिकल्पना’ तथा ‘वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी’ के शुभारम्भ समारोह को संबोधित कर रहे थे।
भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण वे नहीं आ सके। इस अवसर पर उप-राष्ट्रपति ने वीडियो के माध्यम से अपना संदेश दिया।
राज्यपाल ने कहा कि ये दोनों कार्यक्रम भारत की राष्ट्रीय चेतना के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभों को समर्पित हैं। वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में जागृत हुई राष्ट्रभक्ति की भावना को दर्शाती है, जबकि यह संगोष्ठी सरदार पटेल के उस दूरदर्शी नेतृत्व को याद करती है, जिसने देश को एकजुट कर मजबूत भारत की नींव रखी।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस अमर गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा की भावना का संचार किया। यह प्रदर्शनी केवल पुराने दस्तावेजों और तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय जागरण की जीवंत गाथा है, जो विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी।
राज्यपाल ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान केवल 560 से अधिक रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था। बारडोली सत्याग्रह में उनके नेतृत्व, संगठन क्षमता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि इन्हीं गुणों के कारण उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात के केवड़िया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में दिए गए अद्वितीय योगदान को समर्पित है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का सशक्त प्रतीक है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘वंदे मातरम’ पर आधारित कॉफी टेबल बुक, ‘दर्शन ऑफ राधाकृष्णन: इटरनल एंड टेम्पोरल’ संगोष्ठी की कार्यवाही तथा डॉ. एस. राधाकृष्णन पर आधारित बहुभाषी कविता संग्रह का विमोचन भी किया।
उन्होंने प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं लेखक अखिलेश झा द्वारा तैयार वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस प्रदर्शनी के सह-संयोजन में रश्मिता झा तथा शोधकर्ता श्रेयसी झा का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।
इससे पूर्व, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने संस्थान की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच को आज भी प्रासंगिक बताते हुए भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सही दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।
‘ऑर्गेनाइजर वीकली’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने सरदार पटेल के अखंड भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान पर अपने विचार साझा किए। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने राज्यपाल को सम्मानित किया तथा संगोष्ठी और प्रदर्शनी की जानकारी दी। संस्थान के सचिव मेहर चंद नेगी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, घंडल की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना, प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।