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नेपाल बाढ़ त्रासदी के बाद सद्गुरु का बड़ा कदम, 1 करोड़ की मदद का ऐलान; 5 देशों के लिए ‘हिमालयी बोर्ड’ का प्रस्ताव

September 01,2026 Fact Recorder
National Desk:  काठमांडू में ‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने भारत, चीन, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान को मिलकर हिमालयी आपदाओं से निपटने के लिए एक साझा व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बाद ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने राहत और भविष्य की आपदा तैयारियों को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है। काठमांडू में आयोजित ‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम में उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया।

सद्गुरु ने कहा कि हिमालय केवल किसी एक देश का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत, चीन, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान को साथ लाकर एक ‘हिमालयी बोर्ड’ बनाने का सुझाव दिया, ताकि क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से मिलकर निपटा जा सके।

हिमालयी देशों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत

सद्गुरु ने कहा कि हिमालय राजनीतिक सीमाओं और विचारधाराओं से परे है। पहाड़ों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें कौन-सा देश या समुदाय नियंत्रित करता है। इसलिए हिमालय से जुड़ी समस्याओं पर सभी देशों को साथ बैठकर विचार-विमर्श और समन्वय करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भले ही सभी देशों के लिए एक साथ काम करना आसान न हो, लेकिन साझा मुद्दों पर सलाह-मशविरा और आपसी तालमेल बेहद जरूरी है। हिमालय जितना विशाल और सुंदर है, उतना ही संवेदनशील भी है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।

‘नेपाल अकेले इस आपदा से नहीं निपट सकता’

सद्गुरु ने कहा कि हाल की आपदा का प्रभाव अनुमान से कहीं ज्यादा गंभीर रहा। उन्होंने कहा कि नेपाल जैसे देश के लिए इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा से अकेले निपटना मुश्किल है। ऐसे में हिमालयी क्षेत्र से जुड़े सभी देशों को मिलकर राहत, बचाव और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसी घटनाओं के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। उनका कहना था कि किसी आपदा के आने का इंतजार करने के बजाय संभावित खतरों को समझकर पहले से तैयारी की जानी चाहिए।

आपदा को केवल ‘दैवीय घटना’ मानने से बचने की अपील

कार्यक्रम में अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भी सद्गुरु से पूछा कि इतनी बड़ी त्रासदी से लोगों को क्या सीखना चाहिए। जवाब में उन्होंने मानव जीवन की नश्वरता और प्राकृतिक घटनाओं को समझने की जरूरत पर जोर दिया।

सद्गुरु ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को केवल दैवीय इच्छा या रहस्यमयी घटना मानकर छोड़ देना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, भौतिक घटनाएं प्राकृतिक और भौतिक नियमों के अनुसार होती हैं और उन्हें समझने तथा उनसे बचाव की तैयारी करने पर ध्यान देना चाहिए।

मृतकों की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान का ऐलान

सद्गुरु ने नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में ‘काल भैरव कर्म’ किए जाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यह मृतकों की शांति के लिए किया जाने वाला विशेष अनुष्ठान है।

‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम के जरिए उन्होंने तत्काल राहत के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि हिमालय की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।