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भारत में गोल्ड लोन का तेजी से बढ़ता बाजार: पुराने कर्ज चुकाने के लिए ले रहे नया लोन, डिफॉल्ट का खतरा बढ़ा

October 23,2026 Fact Recorder

Business Desk: भारत में गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से विस्तार कर रहा है। सोने की बढ़ती कीमतों और आसानी से कर्ज मिलने के कारण बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। हालांकि, इस तेजी के बीच एक बड़ी चिंता भी सामने आई है। कुछ कर्जदार पुराने कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए नया गोल्ड लोन ले रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ने के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों के लिए भी जोखिम पैदा हो सकता है।

5.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा बैंकों का गोल्ड लोन

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक बैंकों का गोल्ड लोन सालाना आधार पर 88.1 प्रतिशत बढ़कर 5.52 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में इसमें 136.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इससे पता चलता है कि गोल्ड लोन की मांग मजबूत बनी हुई है, हालांकि वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी हुई है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक बैंकों का गोल्ड लोन लगभग 5.6 लाख करोड़ रुपये और NBFC कंपनियों का गोल्ड लोन करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। NBFC के गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 69 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया गोल्ड लोन

गोल्ड लोन बाजार में सबसे बड़ी चिंता कर्जदारों की भुगतान क्षमता को लेकर है। मैक्वेरी की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि कुछ लोग पहले से लिए गए कर्ज का भुगतान करने के लिए सोना गिरवी रखकर नया कर्ज ले रहे हैं। बजाज फाइनेंस और पिरामल फाइनेंस ने भी कुछ कर्जदारों की भुगतान क्षमता को लेकर चिंता जताई है।

पिरामल फाइनेंस के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग के कुल गोल्ड लोन में से लगभग 15 से 23 प्रतिशत ऐसे कर्जदारों को दिए जाने का अनुमान है, जो किसी दूसरे कर्ज की किस्त 90 दिनों से अधिक समय से नहीं चुका रहे थे।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इतने गोल्ड लोन डिफॉल्ट हो चुके हैं। यह आंकड़ा उन ग्राहकों की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जिन पर पहले से कर्ज चुकाने का दबाव है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की पर्सनल लोन की किस्तें बकाया हैं, तो वह सोना गिरवी रखकर नया गोल्ड लोन ले सकता है। इससे पुराने कर्ज का भुगतान तो हो सकता है, लेकिन आमदनी में बढ़ोतरी न होने पर नए कर्ज की किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो सकता है।

क्या गोल्ड लोन लेना जोखिम भरा है?

गोल्ड लोन अपने आप में जोखिम भरा विकल्प नहीं है। कई लोग इसका इस्तेमाल इलाज, बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जरूरतों और कारोबार के लिए पूंजी जुटाने में करते हैं। इसकी मदद से कम समय में वित्तीय जरूरत पूरी की जा सकती है।

हालांकि, कर्ज लेने से पहले अपनी आय, ब्याज दर और भुगतान की क्षमता का आकलन करना जरूरी है। यदि ग्राहक निर्धारित समय पर कर्ज नहीं चुकाता, तो नियमों के अनुसार कर्जदाता गिरवी रखे गए सोने की नीलामी करके बकाया राशि वसूल सकता है। ऐसे में ग्राहक को अपना सोना गंवाना पड़ सकता है।

सोने की कीमतों में गिरावट से बढ़ सकता है जोखिम

गोल्ड लोन कारोबार में सोने की कीमतों की अहम भूमिका होती है। यदि कर्ज लेने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आती है और उसी समय कई ग्राहक भुगतान करने में असफल रहते हैं, तो कर्जदाताओं के लिए पूरी रकम वसूलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, सोने की कीमत के मुकाबले सीमित राशि का कर्ज देने से वित्तीय संस्थानों को कुछ सुरक्षा मिलती है। इसके बावजूद, बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट होने की स्थिति में नुकसान का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता।

RBI के नए नियमों में क्या है खास?

RBI ने जून 2025 में सोने और चांदी के बदले कर्ज देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए। इन नियमों के तहत कर्ज की राशि के आधार पर सोने के मूल्य के मुकाबले अधिकतम लोन की सीमा तय की गई है।

  • 2.5 लाख रुपये तक के कर्ज पर: सोने के मूल्य का अधिकतम 85 प्रतिशत।
  • 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक के कर्ज पर: अधिकतम 80 प्रतिशत।
  • 5 लाख रुपये से अधिक के कर्ज पर: अधिकतम 75 प्रतिशत।

इसके अलावा, व्यक्तिगत जरूरतों के लिए एकमुश्त भुगतान वाले गोल्ड लोन की अवधि अधिकतम 12 महीने निर्धारित की गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य कर्ज देने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और ग्राहकों तथा कर्जदाताओं के जोखिम को नियंत्रित करना है।

गोल्ड लोन बाजार में बढ़ रही कंपनियों की दिलचस्पी

गोल्ड लोन की बढ़ती मांग को देखते हुए कई वित्तीय कंपनियां इस कारोबार में विस्तार कर रही हैं। टाटा कैपिटल, गोदरेज कैपिटल, आदित्य बिड़ला कैपिटल और एलएंडटी फाइनेंस जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजनाओं पर काम कर रही हैं।

हालांकि, कारोबार बढ़ाने के साथ कंपनियों के लिए ग्राहकों की भुगतान क्षमता की सही जांच करना भी जरूरी है। यदि कर्ज देने की प्रक्रिया में सावधानी नहीं बरती गई, तो भविष्य में डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ सकता है।

मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है बाजार

ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन बाजार मार्च 2028 तक बढ़कर 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस अनुमान के बीच बाजार की वास्तविक स्थिति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि ग्राहक कितनी नियमितता से कर्ज चुकाते हैं।

विशेषज्ञों की चिंता यह है कि यदि गोल्ड लोन का इस्तेमाल लगातार पुराने कर्ज चुकाने के लिए किया जाता है, तो कुछ ग्राहकों पर कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है। इसलिए गोल्ड लोन बाजार की वृद्धि के साथ कर्ज की गुणवत्ता और भुगतान क्षमता पर नजर रखना भी जरूरी होगा।