October 23,2026 Fact Recorder
Punjab Desk: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान में पंजाब में एनडीए सरकार का जिक्र होने के बाद दोनों दलों के पुराने गठबंधन की वापसी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों दलों के बीच गठबंधन की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
अमित शाह के बयान से क्यों बढ़ी चर्चा?
भाजपा और अकाली दल कई दशकों तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़े और 2020 में अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद दोनों पार्टियों ने पंजाब में अपनी अलग राजनीतिक राह पर आगे बढ़ने की बात कही।
अब विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए सरकार के संदर्भ में दिए गए अमित शाह के बयान को गठबंधन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, केवल इस बयान के आधार पर किसी नए राजनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं की जा सकती।
भाजपा और अकाली दल के गठबंधन का इतिहास
भाजपा और अकाली दल के राजनीतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों दलों ने विभिन्न चुनावों में मिलकर चुनाव लड़ा और पंजाब में गठबंधन सरकार भी चलाई। वर्ष 1996 में दोनों के बीच औपचारिक गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था।
पारंपरिक रूप से अकाली दल का आधार ग्रामीण क्षेत्रों और सिख मतदाताओं के बीच रहा, जबकि भाजपा को शहरी क्षेत्रों में समर्थन मिलता रहा। दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल को गठबंधन की एक प्रमुख वजह माना जाता था।
वर्ष 2020 में गठबंधन टूटने के बाद दोनों पार्टियों ने स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। अब 2027 के चुनाव को देखते हुए पुराने सहयोग की संभावित वापसी पर चर्चा हो रही है।
दूसरे दलों के साथ भाजपा के समीकरण
पंजाब में भाजपा के राजनीतिक विकल्पों को लेकर भी चर्चा हो रही है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साथ भाजपा के राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रहे हैं। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब दे और अन्य अकाली गुटों की राजनीतिक विचारधाराओं तथा मांगों के चलते उनके साथ किसी संभावित समझौते को लेकर भी कई सवाल हैं।
अकाली दल के अलग-अलग गुटों के साथ भाजपा के संबंधों को लेकर किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए संभावित गठबंधन के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
2027 के चुनाव से पहले क्या होगा आगे?
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों दलों के नेताओं के आधिकारिक बयानों, सीट बंटवारे पर बातचीत और किसी औपचारिक घोषणा पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
फिलहाल, अमित शाह के बयान के बाद गठबंधन की अटकलें जरूर चर्चा में हैं, लेकिन भाजपा और अकाली दल के दोबारा साथ आने को लेकर अंतिम तस्वीर स्पष्ट नहीं है।











