मोदी की राजनीति में जनता पूंजी, कांग्रेस के दौर में रही केवल चुनौती: विचारों की दो धाराएं

06 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपने वक्तव्य के जरिए देश की राजनीति में सोच के फर्क को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देशवासियों को बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी मानती है, जबकि कांग्रेस के लंबे शासनकाल में जनता को केवल एक चुनौती के रूप में देखा गया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब देश की आबादी को ही समस्या के रूप में पेश किया गया। उन्होंने इंदिरा गांधी के एक पुराने विदेशी भाषण का हवाला देते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया था कि देश के सामने कितनी समस्याएं हैं, तो जवाब मिला—35 करोड़। उस वक्त देश की आबादी ही 35 करोड़ थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “उस दौर में देशवासी समस्या माने गए, लेकिन आज हमारी सोच बिल्कुल अलग है। हमारे सामने चाहे कितनी भी चुनौतियां हों, हमारे पास 140 करोड़ समाधान हैं। हमारे लिए हर नागरिक देश की ताकत है, पूंजी है।”

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की विरासत और विकास कार्यों को लेकर भी उसका रवैया अवसरवादी रहा। प्रधानमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कई परियोजनाओं का शिलान्यास किसी और ने किया, लेकिन उद्घाटन उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद हुआ, जो कांग्रेस की कार्यशैली को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य को समर्थकों ने नेतृत्व की दूरदर्शिता और राष्ट्रवादी सोच का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि मोदी सरकार की नीतियों में जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और नागरिकों को सशक्त बनाने की भावना साफ दिखाई देती है।

अपने विचारों को विराम देते हुए लेख में यह भी रेखांकित किया गया कि देशवासियों के लिए यह गर्व का विषय है कि उन्हें ऐसा नेतृत्व मिला है, जो सेवा, सुरक्षा और समर्पण को राजनीति का आधार मानता है। इसी भाव के साथ एक प्रेरणादायक कविता के जरिए राष्ट्र के प्रति निडरता, संकल्प और त्याग की भावना को व्यक्त किया गया।