22 अप्रैल 2025, Fact Recorder
National Desk: बैसरन घाटी की खूबसूरती एक पल में मातम में बदली, पहलगाम हमले की पहली बरसी पर उस दर्दनाक दोपहर की पूरी कहानी दोपहर करीब ढाई बजे। कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों की भारी भीड़ थी। कोई परिवार तस्वीरें खिंचवा रहा था, कोई नवविवाहित जोड़ा वादियों का आनंद ले रहा था। हर तरफ खुशियां थीं, लेकिन अगले ही पल वहां चीख-पुकार मच गई।
कुछ हथियारबंद लोग सेना की वर्दी में वहां पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने पहले पर्यटकों से नाम पूछा और फिर उनका धर्म। जिन्होंने खुद को हिंदू बताया, उन्हें गो*ली मार दी गई। कुछ ही मिनटों में बैसरन घाटी, जिसे कश्मीर की सबसे खूबसूरत जगहों में गिना जाता है, खून और मातम से भर गई।
इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। 17 से अधिक लोग घायल हुए थे।
शांत हो रही घाटी फिर दहशत में डूबी
इस घटना से पहले कश्मीर घाटी में हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे थे। पर्यटन बढ़ रहा था और लंबे समय बाद घाटी में वैसी रौनक लौटती दिख रही थी, जैसी कभी 1970 और 1980 के दशक में हुआ करती थी।
पहलगाम हमेशा से पर्यटकों और अमरनाथ यात्रियों की पसंदीदा जगह रहा है। अमरनाथ यात्रा के लिए बालटाल मार्ग छोटा माना जाता है, लेकिन पहलगाम वाला रास्ता अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण अधिक लोकप्रिय रहा है।
लेकिन 22 अप्रैल 2025 की इस घटना ने घाटी में लौट रहे भरोसे को बड़ा झटका दिया।
हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का आरोप
हमले के बाद शुरुआती जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने इसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से जुड़ी साजिश बताया। जांच में सामने आया कि हमला करने वाले आतंकी स्थानीय लोगों की तरह दिख रहे थे और उन्होंने कई दिनों तक इलाके में छिपकर रेकी की थी।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद भी मिली थी। जांच में मोहम्मद यूसुफ कटारिया नाम के एक व्यक्ति का नाम सामने आया, जिस पर आतंकियों को हथियार और ठिकाना उपलब्ध कराने का आरोप लगा।
इसके बाद सेना और सुरक्षा बलों ने पीर पंजाल के जंगलों और पहाड़ियों में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया।
लश्कर-ए-तैयबा ने ली जिम्मेदारी
हमले के कुछ समय बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इसकी जिम्मेदारी ली। सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि इस हमले का मास्टरमाइंड साजिद जट था, जो पाकिस्तान में छिपा हुआ था।
भारत ने इस हमले के बाद पाकिस्तान पर कड़ा रुख अपनाया। सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई, दोनों देशों के बीच आवाजाही सीमित कर दी गई और एयर स्पेस तक बंद कर दिए गए।
जेडी वेंस के भारत दौरे के दौरान हुआ हमला
यह हमला उस समय हुआ था, जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर थे। उसी दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के भारत विरोधी बयान भी चर्चा में थे।
हमले के समय अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली थी और बड़ी संख्या में पर्यटक तथा श्रद्धालु घाटी की ओर पहुंच रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि आतंकियों ने जानबूझकर ऐसा समय चुना, ताकि अधिक से अधिक दहशत फैलाई जा सके।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ से भारत का जवाब
पहलगाम हमले के 15 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इस अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया।
इस कार्रवाई में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद और कोटली के साथ-साथ पाकिस्तान के बहावलपुर इलाके में मौजूद आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया। भारतीय वायुसेना ने इस अभियान में मिसाइलों और राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया।
भारत का कहना था कि कार्रवाई का उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को नष्ट करना था। यह अभियान 6 मई 2025 को शुरू हुआ और 10 मई को समाप्त कर दिया गया।
पहली बरसी पर फिर ताजा हुआ दर्द
पहलगाम हमले की पहली बरसी पर एक बार फिर उस दिन की भयावह तस्वीरें लोगों के सामने हैं। बैसरन घाटी में घूमने गए वे परिवार, जो खुशियां लेकर लौटना चाहते थे, उनमें से कई कभी वापस नहीं आए।
यह हमला सिर्फ 26 लोगों की हत्या नहीं था, बल्कि उस भरोसे पर भी हमला था, जो धीरे-धीरे कश्मीर में लौट रहा था। एक साल बाद भी उस दोपहर की चीखें और सवाल लोगों के दिलों में जिंदा हैं।













