October 13,2026 Fact Recorder
Education Desk: बिहार में पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अब विश्वविद्यालयों को पीएचडी की उपाधि देने से पहले शोधार्थी की थीसिस यानी शोध प्रबंध को शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके लिए मौखिक परीक्षा पूरी होने के एक सप्ताह के भीतर अपलोडिंग की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। इस संबंध में लोकभवन ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश जारी किए हैं।
शोधगंगा पर थीसिस अपलोड किए बिना नहीं मिलेगी डिग्री
निर्देशों के अनुसार, शोधार्थियों की थीसिस को शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड किए बिना पीएचडी की डिग्री देने की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। विश्वविद्यालयों को निर्धारित समय सीमा के भीतर यह काम करना होगा। सचिवालय प्रशासन ने भी विश्वविद्यालयों से पोर्टल पर अपलोड की गई थीसिस की रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में अब तक 20,152 पीएचडी धारकों की थीसिस शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं, जबकि करीब 50 हजार शोधार्थियों की थीसिस अपलोड होना बाकी है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को लंबित कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
नकल और साहित्यिक चोरी रोकने पर जोर
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के तहत शोध प्रबंध की साहित्यिक चोरी यानी प्लेगरिज्म की जांच के बाद उसे शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शोध कार्यों में मौलिकता को बढ़ावा देना और नकल की समस्या पर अंकुश लगाना है।
शोधगंगा पोर्टल को इन्फॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क (INFLIBNET) के तहत विकसित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर देशभर के विश्वविद्यालयों के शोध प्रबंध उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे विद्यार्थी और शोधकर्ता विभिन्न विषयों पर किए गए शोध को देख और पढ़ सकते हैं।
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पहले ही लागू कर चुका है नियम
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने मई में ही शोधार्थियों के लिए इस प्रक्रिया को लागू करने के निर्देश जारी किए थे। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया था कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं करने पर पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी और शोधार्थी को डिग्री नहीं मिल सकेगी।
थीसिस के साथ जमा करने होंगे जरूरी दस्तावेज
थीसिस अपलोड करते समय शोधार्थियों को निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- थीसिस का शीर्षक पृष्ठ
- घोषणा पत्र और प्रमाणपत्र
- आभार और विषय सूची
- शोध का सारांश यानी एब्स्ट्रैक्ट
- शोध प्रबंध के पांच अध्याय
- निष्कर्ष और संदर्भ सूची
- प्रश्नावली, जहां लागू हो
- भविष्य में किए जाने वाले शोध से संबंधित जानकारी
- प्लेगरिज्म जांच रिपोर्ट
विश्वविद्यालयों द्वारा तय प्रारूप और जरूरी दस्तावेजों का पालन करना आवश्यक होगा। शोधार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विश्वविद्यालय के शोध विभाग से संबंधित दिशा-निर्देशों की पुष्टि कर लें, ताकि डिग्री मिलने की प्रक्रिया में देरी न हो।











