Home Health Meningitis Outbreak: ब्रिटेन में बढ़ते मेनिनजाइटिस के मामलों से दहशत, छात्रों ने...

Meningitis Outbreak: ब्रिटेन में बढ़ते मेनिनजाइटिस के मामलों से दहशत, छात्रों ने की कोविड जैसे लॉकडाउन की मांग

23 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  ब्रिटेन में इन दिनों संक्रामक बीमारी मेनिनजाइटिस के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। खासकर यूनिवर्सिटी ऑफ केंट में संक्रमण के मामले तेजी से सामने आने के बाद छात्र काफी भयभीत हैं। हालात को देखते हुए कई छात्रों ने कोविड-19 के दौर की तरह अस्थायी लॉकडाउन लगाने की मांग भी उठाई है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में एक सोशल इवेंट के बाद कई छात्र मेनिनजाइटिस से संक्रमित पाए गए। अब तक 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से नौ की लैब में पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य मामलों की जांच जारी है। इस प्रकोप के कारण दो छात्रों की मौत भी हो चुकी है।

ब्रिटेन की यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए इसे ‘राष्ट्रीय घटना’ घोषित किया है। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ केंट के छात्रों ने कैंपस को अस्थायी रूप से बंद करने की मांग को लेकर एक याचिका शुरू की है, जिस पर लगभग छह हजार छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं।

खबरों के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर एहतियाती कदम उठा रहा है। अब तक पांच हजार से अधिक छात्रों को मेनिनजाइटिस से बचाव के लिए वैक्सीन और एंटीबायोटिक्स दी जा चुकी हैं। हालांकि निजी तौर पर खरीदी जाने वाली मेनिनजाइटिस-बी वैक्सीन की उपलब्धता सीमित बताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण अक्सर करीबी संपर्क से फैलता है, जैसे कि खाना-पीना साझा करना या किस करना। इसलिए बड़े स्तर पर लॉकडाउन की आवश्यकता पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल के सीनियर क्लिनिकल लेक्चरर डॉ. भरत पंखानिया का कहना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए संक्रमित लोगों को लक्षित एंटीबायोटिक देना ज्यादा प्रभावी तरीका है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने छात्रों को बुखार, तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी या अन्य असामान्य लक्षणों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है।

गौरतलब है कि मेनिनजाइटिस एक गंभीर बीमारी है, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी की झिल्ली में सूजन पैदा करती है। गंभीर मामलों में इससे सुनने और देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, दौरे पड़ सकते हैं और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।