15 May 2026 Fact Recorder
National Desk: Larsen & Toubro और फ्रांस की रक्षा तकनीक कंपनी Exail के बीच एक बड़ा रणनीतिक समझौता हुआ है। इस साझेदारी के तहत भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक अनमैन्ड माइन काउंटर-मेजर सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी।
यह समझौता भारतीय नौसेना के MCMV यानी Mine Counter Measure Vessel प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य समुद्र में बिछाई गई दुश्मन की बारूदी सुरंगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करना है।
क्या है यह नई तकनीक?
नई तकनीक पूरी तरह “अनमैन्ड” यानी मानव रहित प्रणाली पर आधारित होगी। इसमें एडवांस्ड सेंसर और ऑटोमैटिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा, जो समुद्र के भीतर छिपी माइंस को पहचानने और नष्ट करने में सक्षम होंगे।
इस तकनीक की प्रमुख खूबियां
- अत्याधुनिक सेंसर से माइंस की सटीक पहचान
- नौसैनिकों की सुरक्षा में बढ़ोतरी
- समुद्री मिशनों में जोखिम कम होगा
- दुश्मन की समुद्री रणनीति को नाकाम करने में मदद
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक ताकत मजबूत होगी
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक नौसैनिक युद्ध में समुद्री माइंस का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह तकनीक भारतीय नौसेना के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकती है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा
Larsen & Toubro और Exail की यह साझेदारी सिर्फ रक्षा तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Make in India अभियान को भी मजबूती देगी।
इस समझौते के जरिए विदेशी तकनीक और भारतीय निर्माण क्षमता का संयोजन होगा, जिससे भारत भविष्य में रक्षा उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है।
MCMV प्रोजेक्ट क्यों है अहम?
भारतीय नौसेना को कुल 12 Mine Counter Measure Vessels की जरूरत है। साल 2019 में आखिरी माइनस्वीपर जहाज के रिटायर होने के बाद से नौसेना इस क्षमता की कमी महसूस कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक:
- परियोजना की शुरुआती प्रक्रिया जारी है
- कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद पहला जहाज तैयार होने में 4 से 6 साल लग सकते हैं
- यह परियोजना हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए यह रक्षा समझौता भारत की नौसैनिक शक्ति को नई दिशा देगा।













