01 जुलाई 2026 Fact Recorder
National Desk: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन और चोरी के मामले में नया खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को इस चोरी की जानकारी शुरुआत से ही थी और वह मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ मिलकर कथित तौर पर चोरी की रकम की बरामदगी की कोशिश कर रही थी। हालांकि, इस दौरान कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई और पुलिस ने सार्वजनिक रूप से मामले पर चुप्पी बनाए रखी।
सीसीटीवी फुटेज से सामने आई जानकारी
बताया जा रहा है कि हाल ही में सामने आए एक सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मी आरोपी अविनाश शुक्ला को एक वाहन में बैठाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में उनके साथ एक काला बैग भी नजर आता है, जिसमें कथित तौर पर बरामद की गई नकदी रखी गई थी। यह फुटेज 5 जून का बताया जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि पुलिस एफआईआर दर्ज होने से काफी पहले मामले में सक्रिय थी।
6 जून को सामने आया था मामला
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला 6 जून को सार्वजनिक हुआ था। इसके बाद विवाद बढ़ने पर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग उठी। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर 23 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। इससे पहले तक पुलिस अधिकारियों का कहना था कि उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है, इसलिए पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
मामला दबाने के आरोप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी मामले को सार्वजनिक होने से रोकना चाहते थे। आरोप है कि उनकी प्राथमिकता चोरी गई रकम की बरामदगी कर मामले को शांत करना था, इसलिए शुरुआती दौर में पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
पूछताछ को लेकर भी उठे सवाल
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ के दौरान पुलिस पूरी सख्ती नहीं दिखा सकी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने केवल औपचारिक बयान दर्ज किए। अब इस मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और संभावित जिम्मेदार लोगों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।













