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पराली को खेतों में दबाने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है – क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह

Burying stubble in the fields increases

तरणतारन, 22 सितंबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Punjab Desk:  डायरेक्टर कृषि डॉ. जसवंत सिंह के आदेशानुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तरनतारन की ओर से किसानों को धान की पराली को जलाने की बजाय उसके सही प्रबंधन के लिए जागरूक किया गया। यह जागरूकता कार्यक्रम गांव मुगलानी के गुरुद्वारा साहिब में क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह की अगुवाई में आयोजित किया गया। यह मुहिम डिप्टी कमिश्नर श्री राहुल (आईएएस) के दिशा-निर्देशों, मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह की अध्यक्षता तथा नोडल इंचार्ज डॉ. नवतेज सिंह की देखरेख में आयोजित हुई।

डॉ. यादविंदर सिंह ने किसानों से अपील की कि पराली को आग न लगाएँ क्योंकि इससे खेतों में मौजूद मित्र कीड़े नष्ट हो जाते हैं और जमीन की उर्वरक शक्ति घट जाती है। साथ ही, पराली जलाने से सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि जो किसान आलू और मटर की बुआई करना चाहते हैं, वे बेलर मशीन से पराली की गांठें बना सकते हैं या फिर धान की कटाई के बाद मल्चर से पराली को काटकर रिवर्सिबल प्लाऊ की मदद से जमीन में दबा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से नाइट्रोजन, फास्फोरस, गंधक, पोटाश और जैविक पदार्थ जैसे आवश्यक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिसके कारण हमें रासायनिक खादों का सहारा लेना पड़ता है और खेती का खर्च बढ़ जाता है। एक एकड़ पराली जलाने से लगभग 3,000 रुपये का नुकसान होता है। वहीं 10 क्विंटल (1 टन) पराली जलाने से लगभग 400 किलो जैविक पदार्थ, 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 25 किलो पोटाश और 1.2 किलो गंधक का नुकसान होता है।

इस मौके पर पंचायत सचिव दीपक कुमार, किरनदीप सिंह, सचिव सिंह, बलविंदर सिंह, गुरजीत सिंह, मनजीत सिंह, लाल सिंह और अन्य प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।