कैम्ब्रिज: 09 Oct 2026 Fact Recorder
International Desk : अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक मार्गरेट हैमिल्टन का 30 सितंबर 2026 को 90 वर्ष की आयु में नि*धन हो गया। वह नासा के अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टीम की प्रमुख थीं। उनके नेतृत्व में तैयार किए गए सॉफ्टवेयर ने इंसान को चांद तक पहुंचाने और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मार्गरेट हैमिल्टन को आधुनिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की अग्रणी हस्तियों में गिना जाता है। उन्होंने उस दौर में अंतरिक्ष यान के लिए बेहद जटिल और भरोसेमंद सॉफ्टवेयर तैयार करने में योगदान दिया, जब कंप्यूटर तकनीक आज की तुलना में काफी सीमित थी।
जन्म और शिक्षा
मार्गरेट हैमिल्टन का जन्म 1936 में इंडियाना, अमेरिका में हुआ था। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय में गणित की पढ़ाई शुरू की और बाद में अर्लहम कॉलेज से 1958 में गणित में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने दर्शनशास्त्र का भी अध्ययन किया।
1956 में बोस्टन जाने के बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में काम करना शुरू किया। यहां उन्होंने मौसम की भविष्यवाणी से जुड़े सॉफ्टवेयर पर काम किया। यही अनुभव कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की दुनिया में उनके करियर की शुरुआत बना।
SAGE प्रोजेक्ट से अपोलो मिशन तक का सफर
1960 में हैमिल्टन MIT की लिंकन प्रयोगशाला में प्रोग्रामर बनीं। यहां उन्होंने अमेरिका की वायु रक्षा प्रणाली SAGE से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम किया। इस अनुभव के दौरान उन्हें सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता और संभावित त्रुटियों को रोकने के महत्व का एहसास हुआ।
बाद में उन्हें नासा के अपोलो कार्यक्रम के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने का अवसर मिला। उन्होंने MIT इंस्ट्रूमेंटेशन लैब में अपोलो मिशन के ऑनबोर्ड फ्लाइट सॉफ्टवेयर की टीम का नेतृत्व किया। उनका काम कमांड मॉड्यूल और लूनर मॉड्यूल के कंप्यूटर सिस्टम को विश्वसनीय बनाना था।
अपोलो-11 मिशन में निभाई अहम भूमिका
1969 में अपोलो-11 मिशन के दौरान हैमिल्टन की टीम द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चांद पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान जब कंप्यूटर पर अतिरिक्त रडार डेटा का दबाव पड़ा, तब सॉफ्टवेयर ने जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी।
इस व्यवस्था ने नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन को चांद की सतह पर सुरक्षित उतरने में मदद की। इस मिशन ने अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा और हैमिल्टन के काम की अहमियत को दुनिया के सामने रखा।
सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को नई पहचान दिलाई
अपोलो कार्यक्रम के बाद भी हैमिल्टन ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम जारी रखा। 1976 में उन्होंने हायर-ऑर्डर सॉफ्टवेयर नाम की कंपनी शुरू की। इसके बाद 1986 में उन्होंने हैमिल्टन टेक्नोलॉजीज की स्थापना की।
उनकी कंपनियों का उद्देश्य सॉफ्टवेयर में गलतियों को कम करना, सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाना और विकास की प्रक्रिया को बेहतर बनाना था। उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण तकनीकी अनुशासन के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया।
कई बड़े पुरस्कारों से हुईं सम्मानित
मार्गरेट हैमिल्टन को उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। इनमें 2003 का NASA Exceptional Space Act Award, 2017 का Computer History Museum Fellow Award और 2019 का Intrepid Lifetime Achievement Award शामिल हैं। वर्ष 2022 में उन्हें National Aviation Hall of Fame में भी शामिल किया गया।
2015 में अपोलो मिशन के ऐतिहासिक सॉफ्टवेयर को GitHub पर सार्वजनिक किया गया। उनकी एक प्रसिद्ध तस्वीर, जिसमें वह अपोलो सॉफ्टवेयर की प्रिंटेड कोड लिस्टिंग के पास खड़ी दिखाई देती हैं, कंप्यूटर विज्ञान के इतिहास की पहचान बन गई।
परिवार और विरासत
मार्गरेट हैमिल्टन अपने पीछे बेटी लॉरेन हैमिल्टन, दामाद रिचर्ड सेलेसनिक, दो पोते और चार परपोते छोड़ गई हैं। उनकी स्मृति में अगले वसंत में कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स में एक स्मृति सभा आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।
मार्गरेट हैमिल्टन की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रेरित करती रहेंगी। उनका योगदान केवल इंसान को चांद तक पहुंचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने आधुनिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नींव मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।













