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पराग्वे में बैंकिंग संकट से मचा हड़कंप, राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने दिया इस्तीफा; 30 लाख लोगों की जमा पूंजी फंसी

November 6,2026 Fact Recorder

International Desk:  दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में बैंकिंग संकट ने राजनीतिक और आर्थिक हालात बिगाड़ दिए हैं। बैंक में करीब 30 लाख लोगों की जमा पूंजी फंसने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों के बढ़ते आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। वहीं, उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

इस संकट का असर आम लोगों के साथ बुजुर्गों और पेंशनधारकों पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में लोगों की जीवनभर की बचत बैंक में फंस गई है। नाराज लोग लगातार अपना पैसा वापस मांग रहे हैं।

यूएनो बैंक पर केंद्रीय बैंक ने लिया कब्जा

पराग्वे के सेंट्रल बैंक ने दो दिन पहले यूएनो बैंक को अपने नियंत्रण में ले लिया था। बैंक में नकदी की भारी कमी सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य जमाकर्ताओं की रकम को सुरक्षित रखना और देश की बैंकिंग व्यवस्था को बड़े संकट से बचाना है।

बैंकिंग संकट की खबर सामने आने के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। गुरुवार को संसद के बाहर प्रदर्शनकारियों ने ‘हमारा पैसा वापस करो’ के नारे लगाए। इससे पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की।

राष्ट्रपति पर लगे गंभीर आरोप, महाभियोग की प्रक्रिया शुरू

बैंकिंग संकट को लेकर राष्ट्रपति सैंटियागो पेना की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सांसदों ने गुरुवार को उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। उन पर बैंक से जुड़े मामलों में गलत फैसले लेने और निजी हितों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

बताया गया है कि पेना के पास उस कारोबारी समूह के शेयर थे, जिसका यूएनो बैंक पर नियंत्रण था। हालांकि, उन्होंने पिछले साल ही अपने शेयर बेच दिए थे।

संकट बढ़ने के बाद राष्ट्रपति ने केंद्रीय बैंक के प्रमुख कार्लोस कार्वाल्हो से इस्तीफा मांगा था। इसके बाद कार्वाल्हो ने अपना पद छोड़ दिया। पेना ने बैंक में फंसे लोगों के पैसे पांच दिनों के भीतर लौटाने का वादा भी किया था, लेकिन इससे जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

लोगों की बचत फंसी, घर खरीदने का सपना भी टूटा

बैंकिंग संकट का असर आम परिवारों की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। 26 वर्षीय नादिया गोंजालेज ने बताया कि उन्हें अपना पहला घर खरीदने के लिए बैंक से कर्ज मंजूर हुआ था, लेकिन संकट के कारण उन्हें रकम जारी नहीं की गई। इससे उनका घर खरीदने का सपना अधूरा रह गया।

वहीं, 21 वर्षीय छात्र आंद्रेस माल्डोनाडो ने कहा कि उनके परिवार के पास अब पैसे नहीं बचे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मंगलवार और बुधवार को बैंक की शाखाओं के बाहर अपनी जमा रकम निकालने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना संभालेंगे जिम्मेदारी

राष्ट्रपति पेना ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनका इरादा जनता का भरोसा तोड़ने का नहीं था और उनकी प्राथमिकता बैंक में जमा लोगों की बचत को वापस दिलाना है।

वहीं, उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति के संरक्षण में बैंक से पैसा निकाला गया। अब शुक्रवार सुबह महाभियोग की सुनवाई शुरू करने की तैयारी है।

पराग्वे में इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक अस्थिरता और बैंकिंग व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लाखों प्रभावित लोगों की जमा पूंजी वापस दिलाना और जनता का बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बहाल करना है।