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कच्चे तेल में फिर लगी आग! ब्रेंट क्रूड $110 के पार, युद्ध के बढ़ते तनाव से सप्लाई पर संकट

October 16,2026 Fact Recorder

Business Desk: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड मई 2026 के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। आखिरी कारोबारी दिन इसकी कीमत में करीब 3.7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

युद्ध और हमलों से बढ़ी तेल बाजार की चिंता

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ऊर्जा ढांचे पर हमलों के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से बाजार में कीमतें बढ़ने का दबाव है। कारोबारियों को फिलहाल सप्लाई में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।

रूसी डीजल को लेकर अमेरिका में विरोध

अमेरिका में कुछ सांसदों ने रूस से जुड़े डीजल आपूर्ति समझौते को रोकने के उद्देश्य से विधेयक पेश किया है। इस कदम से रूसी ऊर्जा उत्पादों की वैश्विक बाजार में उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि रूसी डीजल की आपूर्ति सीमित होती है, तो अन्य देशों की रिफाइनरियों पर उत्पादन बढ़ाने का दबाव पड़ सकता है।

वहीं, काला सागर क्षेत्र में जारी तनाव और रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी पर हमले जैसी घटनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

इस साल 70 फीसदी से ज्यादा महंगा हुआ कच्चा तेल

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 70 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। युद्ध और सप्लाई में संभावित बाधाओं के कारण डीजल जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी तेजी आई है। यूरोप में डीजल फ्यूचर्स की कीमतें साल की शुरुआत के मुकाबले दोगुने से अधिक हो गई हैं।

ईरान-अमेरिका संघर्ष और बढ़ने की आशंका

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की आशंका भी तेल बाजार को प्रभावित कर रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यूरेशिया ग्रुप के विश्लेषकों ने संघर्ष के और बढ़ने की आशंका को 35 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी कर दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, कीमतों की दिशा आने वाले दिनों में युद्ध की स्थिति, आपूर्ति और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी।