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NTA परीक्षा सुधार पर संसदीय समिति की बड़ी सिफारिशें, CBT मोड में होंगी परीक्षाएं; खाली पद भरने पर जोर

October 17,2026 Fact Recorder 

Education Desk:  राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए संसदीय स्थायी समिति ने कई अहम सुझाव दिए हैं। समिति की 382वीं रिपोर्ट में NEET-UG समेत प्रमुख परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने, प्रश्नपत्र लीक रोकने और NTA में खाली पदों को भरने की सिफारिश की गई है।

पेपर लीक रोकने के लिए बनेगा मजबूत प्रश्न बैंक

समिति के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका कम करने के लिए बड़ा और लगातार अपडेट होने वाला प्रश्न बैंक तैयार किया जाना चाहिए। प्रश्नपत्र तैयार करने और उनका अनुवाद करने के लिए IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया गया है। साथ ही प्रश्नपत्र परीक्षा के नजदीक तैयार करने और उनकी विशेषज्ञों से जांच कराने पर जोर दिया गया है।

NEET-UG समेत परीक्षाएं CBT मोड में कराने का सुझाव

रिपोर्ट में NEET-UG सहित अन्य प्रमुख परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित प्रणाली में लाने का समर्थन किया गया है। इस व्यवस्था से प्रश्नपत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है।

अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा होने पर स्कोर नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने और नियमों की जानकारी पहले से देने की भी सिफारिश की गई है।

हर जिले में सरकारी CBT केंद्र बनाने की सिफारिश

संसदीय समिति ने देशभर में 1,000 से अधिक सुरक्षित सरकारी CBT केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार, हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र होना चाहिए। इसके अलावा परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की राष्ट्रीय ब्लैकलिस्ट तैयार करने और परीक्षा प्रबंधन के लिए स्थायी विशेष कैडर बनाने की सिफारिश की गई है।

NTA में 40 फीसदी से ज्यादा पद खाली

रिपोर्ट के मुताबिक, NTA में 39 स्वीकृत पदों में से केवल 23 पर अधिकारी तैनात हैं। यानी एजेंसी के कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। समिति ने इन पदों को भरने और एजेंसी की कार्यप्रणाली मजबूत करने पर जोर दिया है।

परीक्षा के दौरान बार-बार चेकिंग पर रोक का सुझाव

समिति ने परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की बार-बार तलाशी और परीक्षा के दौरान होने वाली बाधाओं पर चिंता जताई है। सुझाव दिया गया है कि जांच के लिए परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद अलग से 15 मिनट का समय रखा जाए, ताकि विद्यार्थियों की परीक्षा प्रभावित न हो।

देर से परीक्षा केंद्र पहुंचने वाले छात्रों को भी परीक्षा में बैठने का अवसर देने की सिफारिश की गई है। हालांकि, उन्हें केवल बचा हुआ समय मिलेगा और कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

NEET में प्रयासों की संख्या तय करने की सिफारिश

समिति ने NEET-UG में शामिल होने के प्रयासों की संख्या निर्धारित करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए एक सामान्य प्रारंभिक परीक्षा और उसके बाद अलग-अलग विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों के लिए मुख्य परीक्षा आयोजित करने के विकल्प पर विचार करने को कहा गया है।

रिपोर्ट में सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर प्रमुख परीक्षाओं के लिए द्वि-स्तरीय परीक्षा प्रणाली अपनाने की बात भी कही गई है।

परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर

समिति का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केवल तकनीक पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही और परीक्षा की गोपनीयता भी जरूरी है। रिपोर्ट में परीक्षा के दिन सार्वजनिक रैलियों, जुलूसों और बड़े आयोजनों से होने वाली संभावित बाधाओं को रोकने के उपायों पर भी जोर दिया गया है।

ध्यान दें: ये संसदीय समिति की सिफारिशें हैं। इन्हें लागू करने के लिए संबंधित विभागों और प्राधिकरणों के निर्णय आवश्यक होंगे।