October 13,2026 Fact Recorder
Business Desk: टाटा ग्रुप के प्रमुख परोपकारी संस्थानों में शामिल टाटा ट्रस्ट्स के भीतर प्रशासनिक और कारोबारी फैसलों को लेकर विवाद सामने आया है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) से जुड़े मामले में नोएल टाटा समेत संबंधित पक्षों को 19 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला ट्रस्ट के दो वरिष्ठ सदस्यों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की शिकायत के बाद चर्चा में आया है।
नोएल टाटा के नेतृत्व और ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल
शिकायतकर्ताओं ने ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज और टाटा संस के कारोबारी फैसलों में ट्रस्ट की भूमिका पर आपत्ति जताई है। वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह का आरोप है कि कुछ अहम फैसलों में सभी ट्रस्टियों को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने नोएल टाटा को आजीवन ट्रस्टी बनाए रखने और नेविल टाटा की नियुक्ति से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता और सभी ट्रस्टियों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
टाटा संस के कारोबारी फैसलों को लेकर विवाद
शिकायत में टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप को वित्तीय सहायता देने से जुड़े प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि एक परोपकारी ट्रस्ट को कारोबारी मामलों में किस सीमा तक हस्तक्षेप करना चाहिए।
उनकी चिंता है कि इस तरह के फैसलों का असर ट्रस्ट के संचालन और उसकी कर-संबंधी स्थिति पर पड़ सकता है। इन मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकरण की जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
विलय के प्रस्ताव पर भी उठे सवाल
विवाद के बीच 28 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड को भेजे गए एक पत्र का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के विलय से संबंधित प्रस्ताव रखा गया था।
वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने कथित तौर पर इस प्रक्रिया में जानकारी साझा करने और ट्रस्टियों के बीच चर्चा की कमी पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर निर्णय लेने से पहले संबंधित ट्रस्टियों के साथ विचार-विमर्श होना चाहिए था।
सात टाटा ट्रस्ट्स ने दाखिल किए 84 कैविएट
इस विवाद में कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट को छोड़कर सात अन्य टाटा ट्रस्ट्स ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष कुल 84 कैविएट दाखिल किए हैं।
कैविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि संबंधित मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर मिले। इन कदमों से मामले की कानूनी प्रक्रिया और ट्रस्टों के बीच मतभेदों पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
अब 19 अक्टूबर की समयसीमा पर नजर
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से तय समयसीमा के अनुसार, संबंधित पक्षों को 19 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई और उठाए गए सवालों पर विचार महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल विवाद का केंद्र ट्रस्ट का प्रशासन, निर्णय लेने की प्रक्रिया और टाटा संस के कारोबारी मामलों में उसकी भूमिका है। संबंधित पक्षों के जवाब और आधिकारिक कार्यवाही से ही मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।











