अयोध्या, 24 सितंबर 2026 Fact Recorder
National Desk: बहुचर्चित श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने जेल में बंद आठ आरोपितों के खिलाफ अदालत में 73,480 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। 90 दिन की समयसीमा पूरी होने के साथ ही बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार सिंह और विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी चार बड़े बक्सों में चार्जशीट लेकर न्यायालय पहुंचे।
पुलिस के अनुसार, चार्जशीट में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित बैंक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें मामले से अलग रखा गया है। वहीं पूर्व महासचिव चंपतराय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर के व्यवस्था प्रमुख रहे गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाया गया है।
105 घटनाओं और 173 गवाहों का उल्लेख
चार्जशीट के 59 पन्नों में मामले के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जबकि बाकी दस्तावेजों में विवेचना से जुड़े साक्ष्य, आरोपितों और गवाहों के बयान शामिल हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरी से जुड़ी 105 घटनाओं का जिक्र किया है। इसके अलावा 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
पुलिस ने सर्विलांस के जरिए आरोपितों के बीच हुई करीब 3,300 मैसेज की बातचीत भी जुटाई है। चार्जशीट में अनुकल्प मिश्र को कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। पुलिस के अनुसार, वह अन्य लोगों के माध्यम से चोरी करवाता था और चोरी की रकम का बंटवारा जनौरा के पास हाईवे के नजदीक एक बाग में किया जाता था।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद 25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर और एसआईटी की संस्तुति के आधार पर रामशंकर यादव टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
चार्जशीट में पुलिस ने इन सभी आरोपितों की भूमिका का अलग-अलग उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार, अनुकल्प मिश्र ने अपने बहनोई लवकुश को मंदिर में नौकरी दिलाई थी। वहीं चंपतराय के चालक रहे टिन्नू के पास कथित तौर पर बिना किसी आदेश के दानपात्रों की चाबियां होने की बात भी चार्जशीट में दर्ज है।
टिन्नू पर श्रद्धालुओं से पैसे लेने का आरोप
चार्जशीट के अनुसार, टिन्नू श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेता था। इसके अलावा वह वाहनों को किराये पर चलवाता था और पुलिस के मुताबिक इससे उसे करीब 90 हजार रुपये प्रतिमाह की आय होती थी।
पुलिस ने मंदिर से कीमती आभूषण गायब होने की बात को भी खारिज किया है। चार्जशीट में मुख्य रूप से चढ़ावे की धनराशि और उससे जुड़े कथित अनियमित लेनदेन व चोरी की घटनाओं की जांच का विवरण दिया गया है।
किन धाराओं में दर्ज है मामला?
मामले में आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने या उससे संबंधित गतिविधियों, आपराधिक साजिश और साझा आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस के अनुसार, धारा 316(5) जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपी गई धनराशि या संपत्ति के कथित गबन या दुरुपयोग से संबंधित है। इसके अलावा धारा 317(4) और 317(5) चोरी या गबन की संपत्ति को जानबूझकर रखने, छिपाने अथवा उसके निस्तारण में मदद करने से संबंधित हैं।
वहीं धारा 61 आपराधिक साजिश और धारा 3(5) साझा मंशा के तहत सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी से संबंधित है। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कानून में अलग-अलग सजा का प्रावधान है। अंतिम दोष या निर्दोषता का निर्धारण अदालत में सुनवाई के बाद होगा।











