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CDSCO ड्रग अलर्ट: हिमाचल की 63 और उत्तराखंड की 39 दवाओं के सैंपल फेल, देशभर में 221 दवाएं जांच में अधोमानक

सोलन, 23 सितंबर 2026 Fact Reorder

Himachal Desk:  केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी अगस्त के ड्रग अलर्ट में देशभर में दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के 221 सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश की 63 और उत्तराखंड की 39 दवाओं के सैंपल शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 191 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और 29 सैंपल केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में फेल पाए गए। हिमाचल प्रदेश में बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा निर्माण इकाइयों के सैंपल जांच में अधोमानक पाए गए।

राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड की 39, गुजरात की 17, महाराष्ट्र की 16, मध्य प्रदेश की 12, तमिलनाडु और हरियाणा की 11-11, सिक्किम और उत्तर प्रदेश की 9-9 तथा पंजाब की 8 दवाओं के सैंपल फेल मिले। इसके अलावा तेलंगाना की 6, आंध्र प्रदेश की 4, जबकि दमन, केरल और पुडुचेरी की 3-3 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहे। जम्मू-कश्मीर की 2 तथा पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और राजस्थान की 1-1 दवा भी सूची में शामिल है।

किन दवाओं के सैंपल हुए फेल?

गुणवत्ता जांच में एंटीबायोटिक, हृदय रोग की दवाएं, दर्द और बुखार की दवाएं, बच्चों के सीरप, किडनी संबंधी दवाएं, खांसी की दवाएं, पेट की दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पादों के सैंपल फेल पाए गए।

जांच के दौरान कई दवाएं डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय तत्व (API) की निर्धारित मात्रा जैसे गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, जिन कंपनियों की दवाओं के सैंपल अधोमानक पाए गए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित बैच की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने समेत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कंपनियों से जवाब मांगा गया है और जांच पूरी होने के बाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक कई दवा उद्योगों ने फेल हुए सैंपल को चुनौती दी है।

इन दवाओं के सैंपल भी फेल

किडनी की पथरी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली डाइसोडियम हाइड्रोजन साइट्रेट सॉल्यूशन का सैंपल लखनऊ की स्टेडमैड प्राइवेट लिमिटेड की निर्माण इकाई से फेल पाया गया।

सिरमौर स्थित सिंबायसिज फार्मास्यूटिकल्स में बनी सिटाग्लिप्टिन और मेटफार्मिन टैबलेट के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में असफल रहे। संबंधित बैच नंबर TG242142 और एक्सपायरी नवंबर 2026 बताई गई है।

उत्तराखंड की HSN बायोटेक में बनी डेक्सट्रोमेथोर्फन हाइड्रोब्रोमाइड और क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट कफ सिरप का सैंपल भी फेल पाया गया। इसका बैच नंबर CPL 60022 और एक्सपायरी दिसंबर 2027 है।

ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन और ट्रामाडोल-पैरासिटामोल भी सूची में

महाराष्ट्र के पालघर स्थित नियोन लेबोरेट्री में निर्मित ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन का सैंपल भी गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहा। इसका बैच नंबर 91707 और एक्सपायरी मई 2028 बताई गई है।

गंभीर दर्द में इस्तेमाल होने वाली ट्रामाडोल और पैरासिटामोल टैबलेट का सैंपल गुजरात की मैक्सिला मेडिसाइंसेज से फेल पाया गया। इसका बैच नंबर MT-1231 और एक्सपायरी अक्टूबर 2027 है।

सोलन के सुबाथू स्थित जेएम लैबोरेट्री में बनी एजिथ्रोमाइसिन और लैक्टिक एसिड बैसिलस टैबलेट भी गुणवत्ता जांच में असफल रही। यह दवा विभिन्न बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में इस्तेमाल की जाती है।

पैरासिटामोल का सैंपल भी फेल

बद्दी के भुड्ड स्थित स्ट्रासवैल ऑर्गेनिक्स में निर्मित पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन का सैंपल भी फेल पाया गया। इसका बैच नंबर SOLO T-027 और एक्सपायरी सितंबर 2026 बताई गई है।

इसके अलावा पंजाब स्थित डीआर स्किन केयर में निर्मित कोजिक एसिड डिपालमिटेट, विटामिन ई और ग्लिसरीन सोप का सैंपल भी गुणवत्ता परीक्षण में अधोमानक पाया गया। इसका बैच नंबर HS-1787 और एक्सपायरी नवंबर 2026 है।