August 24,2026 Fact Recorder
International Desk: चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब चीन इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। चीन अपने महत्वाकांक्षी चांगई-7 मिशन को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के स्थायी रूप से अंधेरे क्रेटरों में जल-बर्फ की खोज और उसका अध्ययन करना है।
चांगई-7 एक मानवरहित रोबोटिक मिशन है। इसे 24 से 31 अगस्त 2026 के बीच लॉन्ग मार्च-5 वाई14 रॉकेट के जरिए लॉन्च किए जाने की संभावित समयसीमा बताई गई है। मिशन को चांद के दक्षिणी ध्रुव स्थित शेकलटन क्रेटर के आसपास उतारने की योजना है, जहां तापमान करीब -203 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
पानी की खोज पर रहेगा खास जोर
चीन के इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत चंद्रमा पर पानी की तलाश है। मिशन में एक विशेष हॉपर भी शामिल होगा, जिसका इस्तेमाल चंद्र सतह और उसके आसपास के क्षेत्रों की जांच के लिए किया जाएगा। इसके अलावा कई देशों और संस्थानों के वैज्ञानिक उपकरण भी मिशन का हिस्सा हैं।
अगर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होने की पुष्टि होती है, तो भविष्य में इससे पीने का पानी, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन तैयार करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हाइड्रोजन का इस्तेमाल भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में ईंधन के तौर पर भी किया जा सकता है।
चंद्रयान-3 ने भारत को दिलाई ऐतिहासिक बढ़त
भारत ने अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था। मिशन ने चंद्रमा की सतह के तापमान और वहां मौजूद संसाधनों से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए।
चीन का चांगई-7 मिशन केवल पानी की खोज तक सीमित नहीं है। यह चीन के लंबे समय के चंद्र अभियान का हिस्सा है और 2030 तक चांद पर मानव लैंडिंग की उसकी योजना के लिए तकनीकी आधार तैयार करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा चांगई-7 और प्रस्तावित चांगई-8 मिशन भविष्य में इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन की दिशा में भी अहम कदम माने जा रहे हैं।
भारत की रिसर्च भी लगातार आगे बढ़ रही
चंद्रयान-3 के बाद भारत की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर वैज्ञानिक खोज जारी है। विक्रम लैंडर के ‘हॉप’ प्रयोग और ChaSTE उपकरण से मिले आंकड़ों के विश्लेषण से चंद्रमा की मिट्टी की परतों, घनत्व और तापमान में बदलाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
इस तरह चांद का दक्षिणी ध्रुव अब दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों के लिए वैज्ञानिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। भारत के चंद्रयान-3 के बाद चीन का चांगई-7 मिशन इस अंतरिक्ष दौड़ को एक नया आयाम दे सकता है।













