August 10,2026 Fact Recorder
International Desk: ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में करीब पांच महीने पहले हुए स्कूल हमले की यादें आज भी लोगों के जख्मों को ताजा कर देती हैं। हमले में 120 बच्चों समेत कुल 156 लोगों की मौ*त हुई थी। जिस स्कूल में कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ मलबा और तबाही के निशान दिखाई देते हैं।
शजरेह तय्यबेह प्राथमिक स्कूल पर अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के पहले दिन हमला हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल को अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल से निशाना बनाया गया। हमले के बाद पूरा स्कूल तबाह हो गया और बड़ी संख्या में बच्चे मलबे के नीचे दब गए।
स्कूल की पूर्व शिक्षिका अमाइनेह नदीमी ने उस भयावह दिन को याद करते हुए कहा कि अब उस जगह को स्कूल कहना भी मुश्किल है। वहां सिर्फ टूटी हुई दीवारें और तबाही के निशान बचे हैं। उन्होंने बताया कि हमले के बाद उन्होंने कई माता-पिता को अपने बच्चों को बचाने के लिए नंगे पांव स्कूल की ओर दौड़ते देखा।
अमाइनेह ने कहा कि शुरुआती पल में उन्हें लगा था कि सभी बच्चे स्कूल से बाहर निकल गए होंगे, लेकिन बाद में पता चला कि कई बच्चे मलबे के नीचे दबे हुए थे। वह छह वर्षों तक स्कूल में पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाती रही थीं।
मलबे में मिली बच्ची की कॉपी
राहत और बचाव कर्मियों को मलबा हटाने के दौरान आठ वर्षीय माह्या सलारी की एक कॉपी मिली। कॉपी के कई पन्ने सुरक्षित थे। माह्या अपने छोटे भाई अली के साथ स्कूल में थी। हमले से कुछ समय पहले उनकी मां उन्हें लेने स्कूल पहुंची थीं, लेकिन हमले में तीनों की मौत हो गई।
मिनाब की दीवारों और दुकानों पर अब हमले में मारे गए बच्चों की बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं। ये तस्वीरें स्थानीय लोगों के लिए उस त्रासदी और युद्ध की भयावह कीमत की याद बन चुकी हैं।
कब्रिस्तान में मासूमों की छोटी-छोटी कब्रें
मिनाब के कब्रिस्तान में बच्चों की छोटी-छोटी कब्रों की कतारें इस त्रासदी का दर्द बयां करती हैं। नौ वर्षीय सतायेश की मां मासूमेह मेहरान शेखबादी लगभग हर दिन अपनी बेटी की कब्र पर आती हैं।
उन्होंने बताया कि जब वह घटनास्थल पर पहुंचीं तो वहां धुआं और जले हुए लोगों की तेज गंध थी। मलबे के बीच उन्हें शरीर के अंग दिखाई दिए। उनके मुताबिक, उस दृश्य को भूल पाना बेहद मुश्किल है।
मिनाब में आज भी स्कूल के मलबे, बच्चों की तस्वीरें और कब्रिस्तान की कतारें उस हमले की भयावह यादों को जीवित रखे हुए हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक युद्ध की घटना नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदल देने वाली त्रासदी है।













