5 August 2026 Fact Recorder
Business Desk: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आम जनता को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (Inflation) का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने यह फैसला वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और आपूर्ति पक्ष के दबाव में कमी को देखते हुए लिया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।
तिमाही आधार पर बदला महंगाई का अनुमान
आरबीआई के नए अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह 4.2 प्रतिशत आंकी गई थी। दूसरी तिमाही (Q2) का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया गया है। तीसरी तिमाही (Q3) का अनुमान 5.9 प्रतिशत पर यथावत रखा गया है, जबकि चौथी तिमाही (Q4) का अनुमान 5.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत किया गया है।
कोर महंगाई का अनुमान भी घटा
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोर महंगाई (Core Inflation) का अनुमान भी 4.7 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि पहली तिमाही में वास्तविक महंगाई अनुमान से कम रही, जिससे संकेत मिलता है कि लागत का दबाव अभी व्यापक स्तर पर नहीं बढ़ा है। फिलहाल महंगाई पर सबसे अधिक असर खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों का है।
महंगाई पर बनी हुई है RBI की नजर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई और मूल्य स्थिरता केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके अनुसार आने वाले महीनों में खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण महंगाई बढ़ सकती है और तीसरी तिमाही में यह अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होने की संभावना है।
जून में बढ़ी थी खुदरा महंगाई
जून 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई थी, जो मई में 3.93 प्रतिशत थी। यह 17 महीनों में पहली बार था जब महंगाई आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर पहुंची। खाद्य वस्तुओं और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून ने महंगाई पर दबाव बढ़ाया।
त्योहारी सीजन में कीमतें बढ़ने की आशंका
आरबीआई ने आगाह किया है कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण आने वाले महीनों में कई उपभोक्ता उत्पाद महंगे हो सकते हैं। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का असर ग्राहकों पर डाल सकती हैं, खासकर अगस्त से नवंबर तक चलने वाले त्योहारी सीजन के दौरान, जब उपभोक्ता मांग बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से फिलहाल महंगाई पर कुछ राहत मिली है, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और खाद्य एवं ईंधन की कीमतों पर आरबीआई लगातार नजर बनाए हुए है।













