4 August 2026 Fact Recorder
Punjab Desk: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के मामले में पंजाब सरकार को बड़ा झटका दिया है। डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की सभी अपीलें खारिज करते हुए एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा है।
अदालत ने सरकार और पीएसपीसीएल को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान दरों पर डीए और डीआर की सभी लंबित किस्तों का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यदि तय अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो बकाया राशि पर समय सीमा समाप्त होने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
केंद्र के समान डीए-डीआर देने का अधिकार बरकरार
डिवीजन बेंच ने कहा कि एकल पीठ द्वारा तय की गई 30 जून 2026 की समय सीमा अपील लंबित रहने के दौरान समाप्त हो चुकी थी। इसलिए अदालत ने समय सीमा में संशोधन करते हुए सरकार को शीघ्र भुगतान करने का निर्देश दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 18 जून 2021 के निर्णय, उसके बाद बनाए गए नियमों और राज्य सरकार के निर्देशों के आधार पर पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल पहले ही केंद्र सरकार के डीए-डीआर पैटर्न को अपना चुके हैं। ऐसे में कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि भुगतान में देरी केवल राशि जारी करने के समय को प्रभावित कर सकती है, कर्मचारियों के अधिकार या डीए की दर को नहीं।
अनुच्छेद 14 का हवाला
हाई कोर्ट ने कहा कि जब उसी सरकारी खजाने से अखिल भारतीय सेवा (एआईएस) के अधिकारियों को केंद्र सरकार के बराबर डीए दिया जा रहा है, तब अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया रोकना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
अदालत ने 18 फरवरी 2025 की उस भुगतान योजना को भी सही ढंग से निरस्त माना, जिसमें कुछ कर्मचारियों के बकाया का भुगतान 42 किस्तों में करने का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने कहा कि समान वर्ग के कर्मचारियों के साथ इस प्रकार का अलग व्यवहार मनमाना और असंवैधानिक है।
मुख्य सचिव को अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि फैसले का पूर्ण और ईमानदारी से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा अगस्त 2026 के अंत तक अनुपालन रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ हाई कोर्ट रजिस्ट्री में दाखिल की जाए।
इसके अलावा अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी बकाया का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों पर अनावश्यक खर्च से बचे, ताकि वित्तीय संसाधनों की कमी को बकाया भुगतान टालने का आधार न बनाया जा सके।













