31 July 2026 Fact Recorder
National Desk: पेपर लीक मामले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच दिल्ली पुलिस ने तेज कर दी है। पुलिस अब उन प्रदर्शनकारियों की भी पहचान करने में जुटी है जिन्होंने चेहरा ढककर कथित तौर पर हिंसा और पुलिस पर हमला किया था।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए पहले ही हजारों प्रदर्शनकारियों की पहचान कर चुकी है। अब मास्क पहनकर उपद्रव करने वालों तक पहुंचने के लिए करीब 400 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस विभिन्न कैमरों की रिकॉर्डिंग को जोड़कर संदिग्धों की गतिविधियों का क्रम (सीक्वेंस) तैयार कर रही है।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने कथित तौर पर आंसू गैस के प्रभाव को कम करने के तरीकों की ऑनलाइन और एआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी जुटाई थी। इसके अलावा कुछ प्रदर्शनकारी हाई-टेक फेस मास्क, सेफ्टी गॉगल्स और अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। पुलिस इन पहलुओं की भी जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इस मामले में हिंसा, सरकारी कार्य में बाधा और पुलिसकर्मियों पर हमले सहित विभिन्न आरोपों के तहत कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पहचाने गए कुछ प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













