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पंजाब कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी, चुनाव समितियों के गठन के बाद चन्नी गुट और हाईकमान आमने-सामने

12 July 2026 Fact Recorder

Chandigarh Desk: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। चुनावी तैयारियों के तहत पार्टी हाईकमान द्वारा चुनाव समितियों की घोषणा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाला गुट खुलकर विरोध में उतर आया है, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद और गहरे हो गए हैं।

करीब दो महीने तक चले मंथन और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लेने के बाद कांग्रेस हाईकमान ने 1 जुलाई को पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न चुनाव समितियों का गठन किया। हालांकि, समितियों की घोषणा के तुरंत बाद चन्नी गुट ने संगठन में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए फैसले पर पुनर्विचार की मांग शुरू कर दी।

स्थिति को संभालने के लिए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंचे। उन्होंने छह दिनों तक पार्टी के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बैठकें कर संगठन में एकजुटता लाने की कोशिश की। हालांकि, चन्नी गुट अपने रुख पर कायम रहा और बैठक में भी संगठनात्मक बदलावों को लेकर नाराजगी जताई।

शनिवार को कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई करीब दो घंटे की बैठक में भी मतभेद दूर नहीं हो सके। बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि वह बागी नेताओं की बात हाईकमान तक पहुंचाएंगे, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि चुनाव समितियों के गठन संबंधी फैसले में बदलाव की संभावना नहीं है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी जल्द ही इस गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं कर पाती, तो आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सिद्धू मूसेवाला के पिता भी बैठक में पहुंचे

बैठक में दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह सिद्धू भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा कि उनकी प्राथमिकता चुनावी टिकट नहीं, बल्कि उनके बेटे की हत्या के मामले में न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस को कमजोर होते नहीं देखना चाहते और पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए।