18 June 2026 Fact Recorder
Business Desk: भारत में चांदी के आयात में मई 2026 के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल की तुलना में मई में चांदी का आयात करीब 81.6 प्रतिशत घट गया। अप्रैल में जहां 411 मिलियन डॉलर की चांदी आयात की गई थी, वहीं मई में यह आंकड़ा घटकर केवल 76 मिलियन डॉलर रह गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे केंद्र सरकार के दो अहम फैसले हैं। पहला, चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया और दूसरा, चांदी के आयात को ‘प्रतिबंधित श्रेणी’ में शामिल कर दिया गया।
बढ़ते आयात पर लगाई लगाम
पिछले कुछ वर्षों में देश में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात 149.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 12.05 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इससे एक वर्ष पहले यह आंकड़ा 4.83 अरब डॉलर था। आयात में इस असामान्य वृद्धि और विदेशी मुद्रा के बढ़ते बहिर्गमन को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया।
यूएई रूट से हो रहा था आयात का खेल
आयात शुल्क बढ़ने के बाद व्यापारियों ने भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का फायदा उठाना शुरू कर दिया। यूएई से आने वाली चांदी पर शुल्क में मिलने वाली रियायत के कारण कारोबारी दुबई के रास्ते चांदी आयात कर रहे थे। इससे सामान्य आयात शुल्क और यूएई से होने वाले आयात के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया, जिसके चलते सरकार को राजस्व नुकसान और व्यापारिक हेरफेर की आशंका बढ़ने लगी।
लाइसेंस के बिना आयात पर रोक
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 16 मई को अधिसूचना जारी कर चांदी के आयात को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया। अब किसी भी व्यापारी को विदेश से चांदी मंगाने के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
सरकार के इस कदम के बाद बिना अनुमति चांदी आयात करना संभव नहीं रह गया है। भारी आयात शुल्क और लाइसेंस व्यवस्था के संयुक्त प्रभाव से चांदी का आयात एक महीने के भीतर ही कई गुना घट गया।
बाजार की नजर सरकार के अगले कदम पर
अब कारोबारियों और बाजार विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि सरकार भविष्य में कितने आयात लाइसेंस जारी करती है। फिलहाल व्यापारी निर्धारित 15 प्रतिशत शुल्क चुकाकर या यूएई समझौते के प्रावधानों के तहत आयात कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक होगी।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सोने के आयात पर ऐसी कोई नई पाबंदी नहीं लगाई गई है, क्योंकि यूएई के साथ व्यापार समझौते के तहत सोने पर मिलने वाला शुल्क लाभ सीमित है और उसमें हेरफेर की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है।













