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उत्तराखंड न्यायपालिका में बड़ा फेरबदल: कई न्यायिक अधिकारियों के तबादले, दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगी कैंप कोर्ट

18 June 2026 Fact Recorder

National Desk: नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने के उद्देश्य से न्यायिक अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले और नई तैनातियां की हैं। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी अधिसूचना में कई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा सिविल जजों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।

हाई कोर्ट ने विशेष रूप से बच्चों के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए स्थापित फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (पोक्सो कोर्ट) को मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके तहत कई न्यायिक अधिकारियों को पोक्सो अदालतों में नियुक्त किया गया है ताकि मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।

पोक्सो अदालतों में प्रमुख नियुक्तियां

अधिसूचना के अनुसार, रितेश कुमार श्रीवास्तव को काशीपुर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (पोक्सो) का दायित्व सौंपा गया है। वहीं, टिहरी गढ़वाल के परिवार न्यायालय के न्यायाधीश अब्दुल कय्यूम को विकासनगर (देहरादून) स्थित पोक्सो अदालत में स्थानांतरित किया गया है।

कुसुम, जो वर्तमान में टिहरी गढ़वाल में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष हैं, उन्हें देहरादून की फास्ट ट्रैक पोक्सो अदालत में तैनात किया गया है। इसी प्रकार सुधीर तोमर को नैनीताल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (पोक्सो) का कार्यभार सौंपा गया है।

सिविल जजों की जिम्मेदारियों में बदलाव

हाई कोर्ट ने कई सिविल जजों के स्थानांतरण और पदस्थापन के आदेश भी जारी किए हैं। शंभू नाथ सिंह को ऊधम सिंह नगर से देहरादून भेजा गया है, जबकि अनिल कुमार कोरी को जोशीमठ से द्वाराहाट स्थानांतरित किया गया है।

इसके अलावा प्रतीक मथेला, अनुराग त्रिपाठी, प्रतीक्षा केसरवानी, ईशांक, नवीन राणा, परमिंदर कौर, नेहा, धनिष्ठा आर्या और ज्योति सिंह सहित कई न्यायिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

दूरदराज क्षेत्रों में लगेंगी कैंप कोर्ट

हाई कोर्ट ने पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्यायिक सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराने के लिए विशेष कैंप कोर्ट आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

निर्देशों के अनुसार:

  • लैंसडाउन के सिविल जज हर महीने दो दिन धुमाकोट में कैंप कोर्ट लगाएंगे।
  • कोटद्वार के सिविल जज हर माह दो दिन सतपुली में न्यायिक शिविर संचालित करेंगे।
  • चमोली के सिविल जज हर महीने पांच दिनों तक जोशीमठ में कैंप कोर्ट लगाएंगे।
  • टिहरी गढ़वाल के सिविल जज प्रताप नगर में प्रत्येक माह तीन दिन कैंप कोर्ट का संचालन करेंगे।

हाई कोर्ट का मानना है कि इन कैंप कोर्टों से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को न्याय पाने के लिए लंबी यात्राएं नहीं करनी पड़ेंगी और न्याय तक उनकी पहुंच आसान होगी।

अतिरिक्त प्रभार और सिफारिशें

हाई कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को सुझाव दिया है कि टिहरी गढ़वाल और नैनीताल के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को अपने-अपने जिलों में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार दिया जाए।

इसके अलावा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीम अहमद को सप्ताह में दो दिन टिहरी गढ़वाल परिवार न्यायालय का अतिरिक्त प्रभार देने की सिफारिश भी राज्य सरकार को भेजी गई है।

न्यायिक अधिकारियों के इस व्यापक फेरबदल को राज्य की न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, प्रभावी और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।