28 May 2026 Fact Recorder
Chandigarh Desk: चंडीगढ़ ट्राइसिटी के चर्चित रियल एस्टेट नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। रायल बिल्डर और रायल एस्टेट ग्रुप से जुड़े मामले में शुरुआती जांच के दौरान करोड़ों रुपये शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए जाने के संकेत मिले हैं।
जांच के दायरे में अब ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) और पंजाब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के वे अधिकारी भी आ गए हैं, जिन्होंने संबंधित प्रोजेक्ट्स को मंजूरी और सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) की अनुमति दी थी। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं नियमों की अनदेखी कर परियोजनाओं को फायदा तो नहीं पहुंचाया गया।
ईडी अब उन अधिकारियों को समन भेजने की तैयारी कर रही है, जिनके कार्यकाल में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली थी। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि वित्तीय देनदारियां लंबित होने के बावजूद निर्माण गतिविधियों को आगे कैसे बढ़ने दिया गया।
बीते मंगलवार को ईडी की चंडीगढ़ और दिल्ली यूनिट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, मोहाली, जीरकपुर और आसपास के इलाकों में कई परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा, बैंक रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी फाइलें कब्जे में ली गईं।
जांच एजेंसी को शक है कि खरीदारों और निवेशकों से जुटाई गई रकम को प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय अलग-अलग कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। कई संदिग्ध इंटर-कंपनी ट्रांजेक्शन भी सामने आए हैं, जिनमें कम कारोबारी गतिविधि वाली कंपनियों के खातों में भारी रकम भेजे जाने के संकेत मिले हैं।
ईडी अब इन कंपनियों के निदेशकों, शेयरहोल्डिंग पैटर्न और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है। एजेंसी को आशंका है कि शेल कंपनियों का इस्तेमाल मनी ट्रेल छिपाने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया।
यह मामला पंजाब पुलिस द्वारा 19 जुलाई 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि मोहाली के कराला गांव स्थित रिहायशी परियोजना में गमाडा की देनदारियों का भुगतान जानबूझकर नहीं किया गया और करीब 232.67 करोड़ रुपये के चेक बाउंस हुए।
ईडी फिलहाल जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है। इस मामले में प्रवीण कंसल उर्फ राकी, नीरज कंसल, दलजीत सिंह, अनुराग मिधा, लियाकत अली और सुमित बंसल समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं।













