चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष करने की तैयारी, केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

22 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Chandigarh Desk:  चंडीगढ़ नगर निगम में प्रशासनिक स्थिरता और विकास कार्यों में निरंतरता लाने के लिए मेयर के कार्यकाल को एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने की तैयारी तेज हो गई है। इस संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेज दिया है। प्रस्ताव में मेयर के साथ-साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यकाल को भी बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा एक वर्ष का कार्यकाल किसी भी विकास योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। बार-बार नेतृत्व बदलने से कई परियोजनाओं की गति धीमी पड़ जाती है और कई योजनाएं अधूरी रह जाती हैं। ऐसे में यदि कार्यकाल बढ़ाया जाता है तो लंबे समय की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

इस प्रस्ताव को तैयार करने से पहले गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के नगर निगमों की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया। इन्हीं राज्यों के मॉडल को आधार बनाकर चंडीगढ़ के लिए नया प्रारूप तैयार किया गया है।

इस बदलाव को लागू करने के लिए ‘पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976’ की धारा 38 में संशोधन करना होगा। यह अधिनियम चंडीगढ़ में 1994 के विस्तार अधिनियम के तहत लागू है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही मेयर के कार्यकाल में बदलाव संभव होगा।

इस मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने भी अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा होना चाहिए और उसका कार्यकाल पांच वर्ष किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मेयर को अधिक प्रशासनिक अधिकार देने की भी वकालत की।

उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ नगर निगम का गठन वर्ष 1994 में हुआ था और 1996 में पहली बार मेयर का चुनाव कराया गया था। तब से अब तक हर साल चुनाव होने के कारण कुल 30 मेयर चुने जा चुके हैं। यदि शुरू से ही कार्यकाल ढाई वर्ष का होता, तो अब तक मेयरों की संख्या काफी कम होती।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बार-बार होने वाले चुनावों में कमी आएगी और शहर में विकास कार्यों की रफ्तार तथा उनकी निरंतरता बेहतर होने की संभावना है।