ओडिशा में पाकिस्तानी एजेंटों को जानकारी देने वाले 7 दोषियों को 3-3 साल की जेल

16 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  ओडिशा की एक अदालत ने पाकिस्तानी एजेंटों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने के मामले में 7 लोगों को दोषी ठहराते हुए 3-3 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

भुवनेश्वर की सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) अदालत ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर सिम कार्ड हासिल किए और फिर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) तथा अन्य संवेदनशील जानकारियां संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंटों के साथ साझा कीं।

दोषियों की पहचान जाजपुर निवासी प्रीतम कर और सौम्य रंजन पटनायक, नयागढ़ के पथानी सामंत लेंका, सरोज कुमार नायक और प्रद्युम्न साहू, पुणे के अभिजीत संजय तथा गुवाहाटी के इकबाल हुसैन के रूप में हुई है।

ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के अनुसार, आरोपियों ने नकली नामों और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में सिम कार्ड खरीदे। इन सिम कार्डों के जरिए पाकिस्तान में बैठे एजेंटों को OTP और अन्य जानकारी भेजी जाती थी, जिसका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों में किया जा सकता था।

STF के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के बाहर के दो आरोपी पाकिस्तानी एजेंटों के साथ संपर्क बनाने और बाकी आरोपियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे थे। अधिकारी के मुताबिक, इनकी गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती थीं।

जांच के दौरान ओडिशा पुलिस ने इंटरपोल से भी मदद मांगी थी, ताकि पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुंचा जा सके। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई जानकारी साझा नहीं की गई।

आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामान बरामद किया। इनमें 19 महंगे मोबाइल फोन, 47 सक्रिय सिम कार्ड, 61 ATM कार्ड, 23 सिम कार्ड कवर और एक लैपटॉप शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल साइबर धोखाधड़ी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए देश की सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं भी बाहर भेजी जा सकती थीं। इसलिए STF ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच की, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया