02 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: टाइप 2 डायबिटीज को अब तक पूरी तरह खत्म करने की बजाय कंट्रोल करने वाली बीमारी माना जाता है। लेकिन हाल ही में चीन के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल थेरेपी के जरिए इसके इलाज का दावा किया है।
Shanghai Shangzheng Hospital और Peking University के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक 59 वर्षीय मरीज पर यह तकनीक आजमाई। उनका दावा है कि स्टेम सेल की मदद से आर्टिफिशियल पैंक्रियाटिक (अग्न्याशय) सेल्स तैयार कर मरीज में ट्रांसप्लांट की गईं, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित हुआ।
क्या होती है स्टेम सेल थेरेपी?
स्टेम सेल शरीर की ऐसी मूल कोशिकाएं (प्राइमरी सेल्स) होती हैं जो जरूरत पड़ने पर किसी भी प्रकार की विशेष कोशिका में बदल सकती हैं।
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने:
स्टेम सेल से हेल्दी पैंक्रियाटिक इसलेट सेल्स तैयार कीं
ये सेल्स शरीर में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं की तरह काम करती हैं
इन्हें मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किया गया
ये सेल्स ब्लड सप्लाई से जुड़कर जरूरत के अनुसार इंसुलिन रिलीज करती हैं
अगर शरीर में इंसुलिन का निर्माण संतुलित रहता है, तो ब्लड शुगर कंट्रोल में रह सकती है और बाहरी इंसुलिन इंजेक्शन या दवाओं की जरूरत कम हो सकती है।
क्या हर मरीज पर काम करेगी ये थेरेपी?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति का शरीर नई ट्रांसप्लांट की गई कोशिकाओं को स्वीकार कर ले।
कुछ मामलों में शरीर इन सेल्स को रिजेक्ट कर सकता है
लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल जरूरी हैं
अभी किस स्टेज में है रिसर्च?
यह तकनीक अभी शुरुआती रिसर्च और ट्रायल स्टेज में है।
बड़े पैमाने पर अध्ययन बाकी हैं
सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रभाव का मूल्यांकन होना जरूरी है
आम मरीजों के लिए उपलब्ध होने में समय लग सकता है
फिलहाल क्या करें?
डॉक्टरों की सलाह है कि टाइप 2 डायबिटीज के मरीज:
संतुलित आहार लें
नियमित व्यायाम करें
दवाएं और इंसुलिन डॉक्टर की सलाह से लें
नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग करें
निष्कर्ष:
स्टेम सेल थेरेपी भविष्य में डायबिटीज के इलाज का तरीका बदल सकती है, लेकिन फिलहाल इसे पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी मानने से पहले और वैज्ञानिक प्रमाणों की जरूरत है।













