आज का पंचांग, तिथि, शुभ मुहूर्त, योग, नक्षत्र और राहुकाल की पूरी जानकारी

26 January 2026 Fact Recorder

Rashifal Desk:  पंचांग के अनुसार आज यानी 26 जनवरी 2026, सोमवार को भीष्म अष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, तर्पण और दान करने से पितृ दोष शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं आज के दिन का पूरा पंचांग, शुभ-अशुभ समय और धार्मिक महत्व।

📅 आज का पंचांग (26 जनवरी 2026)
  • तिथि: शुक्ल अष्टमी

  • मास (पूर्णिमांत): माघ

  • दिन: सोमवार

  • संवत: 2082

तिथि का समय:

  • शुक्ल अष्टमी – रात्रि 09:17 बजे तक

योग:

  • साध्य – प्रातः 09:11 बजे तक

  • शुभ – 27 जनवरी, प्रातः 06:20 बजे तक

करण:

  • विष्टि – प्रातः 10:16 बजे तक

  • बव – रात्रि 09:17 बजे तक

🌞 सूर्य और 🌙 चंद्र का समय
  • सूर्योदय: प्रातः 07:12 बजे

  • सूर्यास्त: सायं 05:55 बजे

  • चंद्रोदय: प्रातः 11:31 बजे

  • चंद्रास्त: 27 जनवरी, रात्रि 01:30 बजे

✅ आज के शुभ मुहूर्त
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 बजे से 12:55 बजे तक

  • अमृत काल: 27 जनवरी, प्रातः 06:37 से 08:08 बजे तक

⚠️ आज का अशुभ समय
  • राहुकाल: प्रातः 08:33 से 09:53 बजे तक

  • यमगण्ड: प्रातः 11:13 से 12:34 बजे तक

  • गुलिकाल: दोपहर 01:54 से 03:15 बजे तक

⭐ आज का नक्षत्र
  • नक्षत्र: अश्विनी

  • समाप्ति: दोपहर 12:32 बजे तक

अश्विनी नक्षत्र की विशेषताएं:
तेज बुद्धि, सुंदर व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, साहसी स्वभाव, यात्राप्रिय, खेलों में रुचि, लेकिन कभी-कभी अधीर और क्रोधी भी हो सकते हैं।

  • शासक ग्रह: केतु

  • राशि स्वामी: मंगल

  • देवता: अश्विनी कुमार

  • प्रतीक: घोड़े का सिर

🕉️ भीष्म अष्टमी का धार्मिक महत्व

भीष्म अष्टमी हिंदू धर्म में अत्यंत पावन तिथि मानी जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर इच्छामृत्यु का वरण किया था। उन्हें धर्म, त्याग और सत्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किए गए तर्पण और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

🙏 भीष्म अष्टमी पर क्या करें
  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  • पितामह भीष्म का ध्यान कर तिल, कुशा और जल से तर्पण करें

  • पितरों के निमित्त श्राद्ध या तर्पण करें

  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करें

  • सत्य, संयम और धर्म के पालन का संकल्प लें

  • महाभारत के शांति पर्व या भीष्म स्तुति का पाठ करें

  • व्रत रखकर सात्विक भोजन करें

👉 नोट: पंचांग की गणनाएं स्थान के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।