थोड़ा तोल मोल के बोल: राजनीति में भाषा की गंदगी और सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के बिगड़े बोल…पढ़ें ये खास लेख

ऐसी वाणी बोलिये, मन का आपा खोए, कबीर दास जी के आपा खोए का मतलब बिल्कुल स्पष्ट है मान और अहंकार का त्याग करके ऐसे शब्दों में अपनी बात रखें कि औरों के साथ-साथ स्वयं को भी खुशी मिले। नए दौर में बोल मीठे नहीं बिगड़ गए हैं।