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हरियाणा के अंबाला में मेयर उपचुनाव के नतीजे आए अब एक महीने से ऊपर हो गया है। वहीं, मेयर को शपथ लिए एक महीना होने जा रहा है। लेकिन, अभी तक मेयर के लिए ऑफिस की व्यवस्था नहीं हुई है। जिसके बाद मेयर अपने काम काज को एक पार्क से ही चला रहीं हैं। यह पार्क नगर निगम के ऑफिस के सामने ही है। वहीं, बैठ कर मेयर लोगों की समस्याएं भी सुन रहीं हैं।
वहीं, हाल ही में मेयर ने एक जगह ब्यान देते हुए कहा कि जहां तक ऑफिस का सवाल है तो ऑफिस हो या न हो उससे हमारे काम पर कोई फर्क नहीं आ रहा। उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑफिस तब ही शुरू होगा जब यहां के अधिकारी उचित समझेंगे। उन्होंने इसको दलगत राजनीति भी कहा है। अब पढ़िये कहां से शुरू हुआ ऑफिस विवाद… शक्ति रानी बनी थी विधायक उनकी जगह बैठे डिप्टी मेयर अंबाला में रहीं पूर्व मेयर शक्ति रानी के विधायक बनने के बाद से अंबाला की मेयर सीट खाली थी। इस दौरान यहां पर सीनियर डिप्टी मेयर मीना ढींगरा को यह जगह दे दिया गया। तब से ही यह ऑफिस सीनियर डिप्टी मेयर के पास ही था। अब अंबाला में मेयर चुनाव हुए तो यहां से भाजपा की मेयर प्रत्याशी शैलजा सचदेवा विजयी हुई। उनके जीतने के बाद उन्होंने शपथ ली और वह ऑफिस पहुंची तो उनको अपना ऑफिस ही नहीं मिला। पहले दिन से ही पार्क में बैठ कर किया सारा काम अंबाला की जनता ने जिसे मेयर बना कर भेजा उसे ऑफिस के सामने पार्क में बैठकर अपनी काम करने पड़े। वजह थी कि अंबाला मेयर के लिए कमरा था ही नहीं। उन्होंने पहले दिन से ही पार्क में बैठ कर अपनी सारी कागजी कार्रवाई आदि की। उसके बाद उन्होंने जन समस्याएं भी पार्क में ही बैठ कर सुनीं। कई दिनों तक उन्होंने यह क्रम जारी रखा। लेकिन, फिर भी उनके लिए कोई ऑफिस तैयार नहीं किया गया। बढ़ा विवाद तो सीनियर डिप्टी मेयर के साथ ही नेम प्लेट इसके बाद ऑफिस न मिलने का विवाद और ज्यादा बढ़ गया। जिसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर के साथ ही अंबाला की नवनिर्वाचित मेयर की नाम पट्टिका लगा दी। जिसके बाद मेयर ने उस कमरे को लेने से इंकार कर दिया। यह विवाद भी काफी वायरल हुआ। मेयर ने कहा था कि क्या एक मेयर के लिए स्पेरेट कार्यालय नहीं होना चाहिए। मेयर बोली जब उचित समझेंगे अधिकारी तब होगा काम एक कार्यक्रम में जब पत्रकारों ने मेयर शैलजा सचदेवा से ऑफिस को लेकर प्रश्न किया तो उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑफिस तब ही शुरू होगा जब यहां के अधिकारी उचित समझेंगे। उनके जब मन में आएगा तब वह मुझह ऑफिस देंगे। उन्होंने इसको दलगत राजनीति भी कहा है। उन्होंने कहा हम अपना काम बिना ऑफिस के भी कर सकते हैं। जब अफसर ऑफिस तैयार कर के देंगे तब हम अपने परिवार से बातचीत करेंगे। सभी अंबाला के निवासियों से इसमें राय मांगेंगे। उन्होंने कहा कि ऑफिस में बैठने का निर्णय पूरा अंबाला परिवार करेगा। वरिष्ठ नेताओं संग हो चुकी है बातचीत सूत्रों की मानें तो इस मामले में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मिलकर मेयर शैलजा सचदेवा ने अवगत कराया है। उन्होंने पीएम मोदी की यमुना नगर में हुई रैली के बाद मंत्री अनिल विज, केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिली थी। जिसमें उन्होंने अंबला में चल रहे ऑफिस विवाद से अवगत कराया था।












