13 Sep, 2026 Fact Recorder
Health Desk: डेंगू को आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हर मरीज में ये सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में डेंगू के लक्षण हल्के या असामान्य हो सकते हैं और बुखार भी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ सकता। ऐसे में बीमारी को पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मानसून के मौसम में बुखार, उल्टी, मतली, दस्त या शरीर में दर्द जैसी समस्याएं होने पर डेंगू की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल बुखार न होने के आधार पर डेंगू की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। खासकर उन इलाकों में जहां डेंगू के मामले सामने आ रहे हों, अचानक कमजोरी, शरीर में दर्द या पेट से जुड़ी परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए।
क्या है एटिपिकल डेंगू?
डॉ. रेशू अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के मुताबिक, डेंगू के सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ मामलों में संक्रमण के लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं, जबकि कुछ मरीजों में असामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं।
ऐसे मामलों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, अपच, अत्यधिक थकान, सिरदर्द, आंखों के आसपास दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कभी-कभी संक्रमण शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अगर किसी व्यक्ति को लगातार पेट दर्द, बार-बार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, नाक या मसूड़ों से खून आना या अत्यधिक बेचैनी जैसी समस्या हो रही है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। इन लक्षणों को केवल मौसम बदलने, सामान्य कमजोरी या पेट खराब होने की वजह मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बुखार उतरने के बाद भी रहें सावधान
डेंगू को लेकर एक आम गलतफहमी है कि बुखार कम होते ही मरीज खतरे से बाहर हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मरीजों में बुखार कम होने के आसपास का समय भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इस दौरान शरीर में पानी की कमी और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।
इसलिए बुखार कम होने के बाद भी मरीज की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार निगरानी व उपचार करना महत्वपूर्ण है।
सिर्फ प्लेटलेट्स देखकर तय नहीं होती बीमारी की गंभीरता
डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स की संख्या के आधार पर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती। डॉक्टर मरीज के लक्षणों, शारीरिक स्थिति और आवश्यक जांचों को ध्यान में रखकर उपचार का फैसला करते हैं।
इसलिए डेंगू की आशंका होने पर खुद से इलाज करने या केवल प्लेटलेट्स की रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
डेंगू के मौसम में इन संकेतों पर दें ध्यान
डेंगू के मामलों वाले मौसम में अचानक कमजोरी, उल्टी, शरीर में दर्द, पेट की परेशानी, भूख न लगना या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। हर डेंगू मरीज में तेज बुखार हो, यह जरूरी नहीं है। समय पर चिकित्सकीय सलाह और सही जांच बीमारी की पहचान और उचित उपचार में मदद कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध विशेषज्ञ जानकारी पर आधारित है। किसी भी बीमारी के लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लें।













