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नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का पूरा पंचांग

आज का पंचांग, 14 अक्टूबर 2026 Fact Recorder

Rashifal Desk : बुधवार को शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। आज विनायक चतुर्थी व्रत और भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, आज आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि, अनुराधा नक्षत्र, वणिज करण और आयुष्मान योग रहेगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे।

आज रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग सहित कई शुभ योग बन रहे हैं। वहीं, राहुकाल दोपहर 12:07 बजे से 1:33 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल मुहूर्त का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। देवी की आठ भुजाएं हैं और वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों के साथ अमृत कलश, माला और कमल धारण करती हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान श्रद्धालु उन्हें पुष्प, फल, मिठाई और हलवे का भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को आरोग्य, सुख-समृद्धि, शक्ति और यश का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मां कूष्मांडा का मंत्र: ‘ऐं ह्री देव्यै नमः’

विनायक चतुर्थी पर करें भगवान गणेश की पूजा

आज विनायक चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के दौरान दूर्वा, मोदक, लड्डू, फल, पुष्प, अक्षत, सिंदूर, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश जी की आराधना से विघ्न दूर होते हैं और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता के अनुसार, इस दिन चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लगने का भय रहता है।

आज का पंचांग: 14 अक्टूबर 2026

  • दिन: बुधवार
  • तिथि: शुक्ल चतुर्थी, रात 1:13 बजे तक (15 अक्टूबर), इसके बाद पंचमी
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • नक्षत्र: अनुराधा, सुबह 4:03 बजे तक (15 अक्टूबर), इसके बाद ज्येष्ठा
  • करण: वणिज दोपहर 12:16 बजे तक, इसके बाद विष्टि रात 1:13 बजे तक
  • योग: आयुष्मान रात 8:39 बजे तक, इसके बाद सौभाग्य
  • चंद्र राशि: वृश्चिक
  • दिशाशूल: दक्षिण दिशा

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: सुबह 6:21 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:53 बजे
  • चंद्रोदय: सुबह 9:49 बजे
  • चंद्रास्त: शाम 7:57 बजे

आज के शुभ मुहूर्त और योग

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 से 5:31 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: आज नहीं है
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:02 से 2:48 बजे तक
  • अमृत काल: शाम 4:38 से 6:23 बजे तक
  • रवि योग: सुबह 6:21 बजे से 15 अक्टूबर सुबह 4:03 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 6:21 बजे से 15 अक्टूबर सुबह 4:03 बजे तक
  • अमृत सिद्धि योग: सुबह 6:21 बजे से 15 अक्टूबर सुबह 4:03 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:42 से 15 अक्टूबर रात 12:32 बजे तक

दिन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • लाभ-उन्नति: सुबह 6:21 से 7:48 बजे तक
  • अमृत-सर्वोत्तम: सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक
  • शुभ-उत्तम: सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक
  • चर-सामान्य: दोपहर 3:00 से 4:26 बजे तक
  • लाभ-उन्नति: शाम 4:26 से 5:53 बजे तक

रात के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • शुभ-उत्तम: शाम 7:26 से रात 9:00 बजे तक
  • अमृत-सर्वोत्तम: रात 9:00 से 10:34 बजे तक
  • चर-सामान्य: रात 10:34 से 15 अक्टूबर रात 12:07 बजे तक
  • लाभ-उन्नति: 15 अक्टूबर सुबह 3:14 से 4:48 बजे तक

आज के अशुभ समय और राहुकाल

  • राहुकाल: दोपहर 12:07 से 1:33 बजे तक
  • यमगंड: सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक
  • गुलिक काल: सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक
  • भद्रा: दोपहर 12:16 बजे से 15 अक्टूबर रात 1:13 बजे तक
  • भद्रा का वास: स्वर्ग
  • दिशाशूल: दक्षिण दिशा

शिववास

पंचांग के अनुसार, शिववास रात 1:13 बजे तक क्रीड़ा में रहेगा। इसके बाद कैलाश पर माना जाएगा।

धार्मिक मान्यता: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा और विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।